दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर बड़ा अपडेट, इस तारीख तक केरल पहुंच सकता है मॉनसून

Edited By Updated: 01 Jun, 2026 07:42 PM

major on southwest monsoon it may reach kerala by this date

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को अपने पूर्वानुमान में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले दो से तीन दिन में केरल पहुंचने की संभावना है। आम तौर पर मानसून का मौसम लगभग एक जून से शुरू होता है। मौसम विभाग ने कहा, ''अगले दो- तीन दिन में...

नेशनल डेस्क: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को अपने पूर्वानुमान में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले दो से तीन दिन में केरल पहुंचने की संभावना है। आम तौर पर मानसून का मौसम लगभग एक जून से शुरू होता है। मौसम विभाग ने कहा, ''अगले दो- तीन दिन में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं।

आईएमडी ने कहा कि इस अवधि के दौरान दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों एवं दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के शेष हिस्सों में भी यह आगे बढ़ सकता है। आईएमडी ने इससे पहले केरल में मानसून के आगमन की तारीख 26 मई बताई थी। हालांकि, मानसून के आगे बढ़ने की प्रक्रिया में देरी हुई और विभाग ने 29 मई को कहा था कि इसका आगमन अगले सप्ताह हो सकता है। पिछले सप्ताह जारी अपने संशोधित पूर्वानुमान में आईएमडी ने कहा कि इस मौसम में बारिश सामान्य से कम रहेगी। 

आईएमडी ने यह भी कहा कि इस वर्ष भारत में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 90 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। एलपीए से आशय किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे एक माह या पूरे मौसम के दौरान हुई वर्षा के उस औसत से है, जिसकी गणना आमतौर पर 30 से 50 वर्षों के दीर्घकालिक आंकड़ों के आधार पर की जाती है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे भारत में मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। यदि किसी वर्ष मानसून के दौरान होने वाली वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो आईएमडी उसे ''कम वर्षा वाला'' मानसून घोषित करता है।

 आईएमडी के अनुसार, इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की एक प्रमुख वजह अल नीनो परिस्थितियों का विकसित होना हो सकता है। अल नीनो की स्थिति आमतौर पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा को प्रभावित करती है और बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है। 

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