Edited By Anu Malhotra,Updated: 11 Sep, 2026 03:39 PM

दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स में एक बेहद ही दुर्लभ और चौंकाने वाला मेडिकल मामला सामने आया है। इनफर्टिलिटी (बांझपन) की समस्या लेकर पहुंचे एक शख्स की जब अपने टेस्ट करवाए तो उसके पेट के अंदर विकसित गर्भाशय (Uterus) और फैलोपियन ट्यूब...
नई दिल्ली: दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स में एक बेहद ही दुर्लभ और चौंकाने वाला मेडिकल मामला सामने आया है। इनफर्टिलिटी (बांझपन) की समस्या लेकर पहुंचे एक शख्स ने जब अपने टेस्ट करवाए तो उसके पेट के अंदर विकसित गर्भाशय (Uterus) और फैलोपियन ट्यूब जैसी संरचनाएं पाई गईं।
क्या है पूरा मामला?
26 वर्षीय मरीज आम पुरुषों की तरह सामान्य जिंदगी जी रहा था और उसमें पुरुषों वाली ही तमाम शारीरिक विशेषताएं थीं। शादी के बाद पिता न बन पाने के कारण जब वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा तो शुरुआती जांच में कई विसंगतियां सामने आईं।
एक न्यूज चैनल के हवाले से डॉक्टर ने बताया कि मरीज इनफर्टिलिटी के लिए मेरे पास आया था। वैसे वह पूरी तरह सक्रिय था। उसमें पुरुषों वाले सभी लक्षण थे। शारीरिक जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मरीज के स्क्रोटम (अंडकोष की थैली) में टेस्टिस मौजूद नहीं थे। सीमेन एनालिसिस रिपोर्ट में स्पर्म पूरी तरह गायब मिले, जिसे मेडिकल में एज़ोस्पर्मिया (Azoospermia) कहा जाता है।
आगे की जांच जानने के लिए डॉक्टरों ने क्रोमोसोम टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और MRI कराया। जिसके नतीजे हैरान कर देने वाले थे। मरीज में '46, XY' मेल क्रोमोसोम पाए गए, जो एक सामान्य पुरुष के होते हैं। पेल्विक एरिया के अंदर पूरी तरह बना गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी नली पाई गई। मरीज के दोनों टेस्टिस अंडकोष की थैली के बजाय पेट के अंदर ही फंसे रह गए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति 'पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम' (PMDS) कहलाती है। यह एक दुर्लभ Genetic Disorder है। इसका मतलब है कि पुरुष के शरीर के अंदर गर्भाशय (uterus) मौजूद होता है, जबकि उसके बाहरी जननांग (जैसे अंडकोष और लिंग) सामान्य होते हैं। इसलिए, यह एक बहुत ही दुर्लभ स्थिति है। दुनिया भर के मेडिकल लिटरेचर में अब तक इसके 300 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाले गए अंग
वहीं इस केस में मेडिकल टीम ने लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया से गर्भाशय और दोनों अंडकोष को हटाने का फैसला किया। यह एक ऐसी सर्जिकल तकनीक है जिसमें शरीर पर बहुत छोटा चीरा लगाना पड़ता है। डाॅक्टर के अनुसार, मरीज़ को समझाया कि हमें उन महिला ओवरीज़ (अंडाशय) को निकालना होगा। इन्हें हटाने की वजह यह थी कि उनमें कैंसर होने का हमेशा खतरा रहता है। निकालने के बाद, टिश्यू को बायोप्सी के लिए भेजा गया। वहीं, जांच में मैलिग्नेंसी (कैंसर) के बहुत कम लक्षण दिखे। उन्होंने कहा, "बायोप्सी में भी मैलिग्नेंसी के बहुत कम लक्षण पाए गए।" उन्होंने आगे कहा कि शरीर के अंदर रह गए अंडकोष (undescended testes) को निकालना ज़रूरी समझा गया, क्योंकि उन्हें पेट के अंदर छोड़ने से भविष्य में कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता था।
क्या है पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम ?
PMDS यौन विकास से जुड़ी एक दुर्लभ समस्या है। इसमें ऐसे व्यक्ति के शरीर में मुलेरियन संरचनाएं (जैसे गर्भाशय और कभी-कभी फैलोपियन ट्यूब) मौजूद रहती हैं, जिनमें पुरुष क्रोमोसोम और आमतौर पर पुरुष बाहरी जननांग होते हैं। डॉक्टर ने बताया कि सामान्य पुरुष विकास के दौरान, अंडकोष से बनने वाले 'एंटी-मुलेरियन हार्मोन' (AMH) के कारण मुलेरियन डक्ट्स खत्म हो जाती हैं। अगर AMH का उत्पादन ठीक से न हो या शरीर उस पर सही प्रतिक्रिया न दे, तो ये संरचनाएं शरीर में बनी रह सकती हैं।