Edited By Anu Malhotra,Updated: 03 Feb, 2026 09:40 AM

मणिपुर की राजनीति में एक साल से जारी सन्नाटा अब खत्म होने वाला है। राज्य में राष्ट्रपति शासन की मियाद पूरी होने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने नई सरकार के गठन की बिसात बिछा दी है। हिंसा के दौर से गुजरने के बाद अब इम्फाल से लेकर दिल्ली तक सियासी...
नेशनल डेस्क: मणिपुर की राजनीति में एक साल से जारी सन्नाटा अब खत्म होने वाला है। राज्य में राष्ट्रपति शासन की मियाद पूरी होने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने नई सरकार के गठन की बिसात बिछा दी है। हिंसा के दौर से गुजरने के बाद अब इम्फाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है, जहाँ एनडीए के विधायक भविष्य की सरकार का खाका तैयार करने के लिए डेरा डाले हुए हैं।
नए नेतृत्व की तलाश और समीकरण
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को विधायक दल का नेता चुनने के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आज शाम तक मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है। इस दौड़ में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के साथ-साथ कई बड़े चेहरे शामिल हैं। चर्चा यह भी है कि राज्य में शांति बहाली और समुदायों के बीच संतुलन बनाने के लिए बीजेपी किसी कुकी विधायक को डिप्टी सीएम का पद सौंप सकती है, ताकि जातीय समीकरणों को साधा जा सके।
12 फरवरी की 'डेडलाइन' और संवैधानिक मजबूरी
मणिपुर में सरकार गठन की यह जल्दबाजी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक भी है। फरवरी 2025 में एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लगे राष्ट्रपति शासन की एक साल की अवधि 12 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। नियमों के मुताबिक, विशेष परिस्थितियों के बिना राष्ट्रपति शासन को एक साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में केंद्र सरकार के पास 12 फरवरी से पहले चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
शांति की ओर बढ़ते कदम
बीते कुछ महीनों में केंद्र के सीधे हस्तक्षेप और सुरक्षा बलों की तैनाती से मणिपुर में हिंसा की घटनाओं में भारी कमी आई है। भाजपा आलाकमान का मानना है कि अब राज्य एक स्थिर सरकार के लिए तैयार है। दिसंबर में बी.एल. संतोष और संबित पात्रा के इम्फाल दौरे के बाद से ही जमीनी स्तर पर विधायकों को एकजुट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। अब सबकी नजरें राज्यपाल के पास पेश किए जाने वाले सरकार बनाने के दा