Edited By Tanuja,Updated: 09 Apr, 2026 11:39 AM

अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ, लेकिन कुछ ही घंटों में हालात बिगड़ गए। लेबनान में इज़राइल के हमले जारी हैं, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर बंद कर दिया। भारी मौतें, तनाव और शर्तों पर मतभेद से यह युद्धविराम बेहद कमजोर नजर...
International Desk: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच अचानक दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ। यह समझौता उस समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो बड़ा सैन्य हमला किया जाएगा। इस दबाव के बाद तीनों पक्ष किसी तरह सीजफायर पर सहमत हुए। लेकिन यह राहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई। युद्धविराम लागू होने के कुछ ही घंटों बाद फिर से हमलों की खबरें आने लगीं। खासतौर पर लेबनान में हालात बेहद खराब हो गए, जहां इज़राइल ने राजधानी बेरूत के कई इलाकों पर जोरदार बमबारी की। इन हमलों में एक ही दिन में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए।
इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया कि यह युद्धविराम हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उनकी कार्रवाई पर लागू नहीं होता। यानी इज़राइल लेबनान में अपने हमले जारी रखेगा। यही वजह है कि युद्धविराम के बावजूद जमीनी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा। इधर ईरान ने भी बड़ा कदम उठाया। उसने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग Strait of Hormuz को फिर से बंद कर दिया। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान का कहना है कि वह यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलेगा, जबकि अमेरिका इस बात से सहमत नहीं है। इससे वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है।
युद्धविराम की शर्तों को लेकर भी भारी मतभेद सामने आए हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगानी होगी, जबकि ईरान इस पर खुलकर सहमत नहीं हुआ है। वहीं, इज़राइल लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर अड़ा हुआ है। इन अलग-अलग दावों ने समझौते को और कमजोर बना दिया है। इस बीच लेबनान में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार करीब 11 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी हमले हुए हैं, जिससे हालात और खराब हो गए हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी माना है कि यह एक “नाजुक समझौता” है और इसमें कई समस्याएं हैं। दुनिया के कई देशों ने भी चिंता जताई है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह युद्धविराम कभी भी टूट सकता है। कुल मिलाकर, यह सीजफायर शांति का स्थायी समाधान नहीं बल्कि एक अस्थायी राहत है। लगातार हमले, आर्थिक दबाव और राजनीतिक मतभेद इस बात का संकेत दे रहे हैं कि मध्य-पूर्व में स्थिति अभी भी बेहद अस्थिर है और आने वाले दिनों में बड़ा संघर्ष फिर भड़क सकता है।