Social Media Age Limit in India: बच्चे नहीं चला पाएंगे Insta- Facebook! केंद्र सरकार जल्द ला रही है नए कानून

Edited By Updated: 18 Feb, 2026 01:52 PM

modi govt plans age based restrictions for social media in india

अक्सर हम देखते हैं कि बच्चे अपना काफी समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। छोटी उम्र में सोशल मीडिया का अति अपयोग बच्चों पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव डालता है। इसके चलते ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे विकसित देशों में सोशल मीडिया के प्रयोग को लेकर नियम सख्त कर...

नेशनल डेस्क: अक्सर हम देखते हैं कि बच्चे अपना काफी समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। छोटी उम्र में सोशल मीडिया का अति अपयोग बच्चों पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव डालता है। इसके चलते ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे विकसित देशों में सोशल मीडिया के प्रयोग को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब ऐसी जानकारी सामने आई है कि केंद्र सरकार बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंगलवार को India AI Impact Summit के दौरान केंद्रीय आईटी और सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र के आधार पर पाबंदियां लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए उद्योग जगत और सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरु हो चुका है।

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क्यों पड़ रही है सख्त नियमों की जरूरत?

स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के इस दौर में बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ा है। अश्विनी वैष्णव ने जोर देकर कहा कि साइबर बुलिंग, आपत्तिजनक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत से बच्चों और समाज को बचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि संसदीय समिति ने भी इस मुद्दे पर गहराई से अध्ययन किया है और सख्त नियमों की सिफारिश की है।

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विदेशी मॉडलों पर भी सरकार की नजर

भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो यह कदम उठा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का कानून लागू किया है। फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है। सरकार इन देशों के अनुभवों और भारत के 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' (DPDP) के प्रावधानों को मिलाकर एक मजबूत नीति तैयार कर रही है।

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सिर्फ उम्र ही नहीं, डीपफेक पर भी होगी नकेल

अश्विनी वैष्णव ने यह भी साफ किया कि सरकार डीपफेक और एआई जनित भ्रामक कंटेंट को लेकर बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि मेटा, एक्स (X), यूट्यूब और नेटफ्लिक्स जैसी सभी कंपनियों को भारतीय संविधान और यहां के सांस्कृतिक ताने-बाने के अनुरूप काम करना होगा। जल्द ही इस संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।

 

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