स्टीव जॉब्स-ज़करबर्ग कनेक्शन से बढ़ी दिलचस्पी, 2 करोड़ में बनी 'हनुमान अंश' ने कमाए 72.88 करोड़

Edited By Updated: 05 Sep, 2026 04:15 PM

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भारतीय सिनेमा में अक्सर बड़े बजट और नामचीन सितारों के दम पर फिल्में सुपरहिट होती हैं, लेकिन विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने इन सभी अवधारणों को किनारे करते हुए  सिर्फ 2 करोड़ रुपए के मामूली प्रोडक्शन बजट में बनी इस हिंदी...

मुंबई: भारतीय सिनेमा में अक्सर बड़े बजट और दिग्गज सितारों के दम पर फिल्में सुपरहिट होती हैं, लेकिन विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने इन सभी अवधारणों को किनारा किया और सिर्फ 2 करोड़ रुपए के मामूली प्रोडक्शन बजट में बनी फिल्म ने भारत में 28 दिनों के भीतर 72.88 करोड़ की नेट और लगभग  85.97 करोड़ की ग्रॉस कमाई की है। 

फिल्म की लागत के मुकाबले 4000% से अधिक का यह रिटर्न नीम करौली बाबा के प्रति लोगों की गहरी आस्था, 'वर्ड ऑफ माउथ' के जबरदस्त प्रभाव और स्टीव जॉब्स व मार्क ज़करबर्ग जैसे वैश्विक टेक दिग्गजों से जुड़े उनके ऐतिहासिक कैची धाम कनेक्शन के कारण संभव हुआ है।

बता दें कि 'हनुमान अंश' को शुरुआत में बेहद कम स्क्रीन मिली थीं और पहले दिन इसका खाता महज 10 लाख रुपए की कमाई से खुला था। हालांकि, फिल्म देखने वाले दर्शकों की  वर्ड ऑफ माउथ के कारण इसकी मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती गई। आमतौर पर फिल्में रिलीज के तीसरे या चौथे हफ्ते में धीमी पड़ जाती हैं, लेकिन इस फिल्म ने चौथे हफ्ते के 28वें दिन ही 11 करोड़ की नेट कमाई कर ट्रेड एनालिस्ट्स को चौंका दिया।

नीम करौली बाबा से जुड़ाव
'हनुमान अंश' के केंद्र में नीम करौली बाबा हैं, जिन्हें महाराज-जी के नाम से भी जाना जाता है। वे एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु थे जिनका प्रभाव भारत में उनके अनुयायियों से कहीं ज़्यादा दूर तक फैला था। उत्तराखंड के कैंची धाम स्थित उनके आश्रम का नाता सिलिकॉन वैली के दुनिया के सबसे प्रभावशाली टेक दिग्गजों से जुड़ा हुआ है।

स्टीव जॉब्स और ज़करबर्ग की कहानी से बढ़ी दिलचस्पी
दरअसल, 1974 में स्टीव जॉब्स आध्यात्मिक मार्गदर्शन की तलाश में नीम करौली बाबा से मिलने भारत आए थे, हालांकि बाबा का निधन 1973 में ही हो चुका था। फिर भी कैंची धाम में बिताए समय ने जॉब्स की जीवन शैली और सोच पर गहरा प्रभाव डाला।

इसके बाद  2015 में जब फेसबुक कठिन दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स की सलाह पर ज़करबर्ग ने कैंची धाम की यात्रा की थी। इस यात्रा के बाद ज़करबर्ग ने स्वीकार किया था कि आश्रम के अनुभव ने उन्हें अपनी कंपनी के मूल मिशन को दोबारा समझने में मदद की। जॉब्स-ज़करबर्ग कनेक्शन ने नीम करौली बाबा की कहानी को पारंपरिक आध्यात्मिक दायरे से बाहर के लोगों तक पहुंचाने में मदद की है।

बता दें कि यह फ़िल्म सिर्फ़ किसी बड़े स्टार की लोकप्रियता या बड़े प्रोडक्शन बजट के भरोसे नहीं चल रही है। बल्कि, इसकी अपील एक आध्यात्मिक कहानी, लोगों के बीच चर्चा और एक ऐसी हस्ती के बारे में उत्सुकता से बढ़ी है, जिसका प्रभाव उत्तराखंड के एक आश्रम से लेकर दुनिया की टेक्नोलॉजी राजधानियों तक फैला हुआ है।  

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