Edited By Anu Malhotra,Updated: 22 Jun, 2026 10:47 AM

नई दिल्ली से आई हालिया NFHS-6 (2023-24) रिपोर्ट के अनुसार भारत में नशे की आदतों में एक नया और चिंताजनक बदलाव देखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि पुरुषों में शराब का सेवन बढ़ा है, जबकि महिलाओं में तंबाकू का उपयोग बढ़ता जा रहा है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर...
Alcohol/ Smoking: नई दिल्ली से आई हालिया NFHS-6 (2023-24) रिपोर्ट के अनुसार भारत में नशे की आदतों में एक नया और चिंताजनक बदलाव देखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि पुरुषों में शराब का सेवन बढ़ा है, जबकि महिलाओं में तंबाकू का उपयोग बढ़ता जा रहा है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ राहत के संकेत भी हैं। कुल मिलाकर महिलाओं में तंबाकू सेवन थोड़ा घटकर 8.9% से 8.4% हुआ है, लेकिन कई राज्यों में इसका उल्टा रुझान देखने को मिला है। 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं में तंबाकू उपयोग बढ़ा है। इनमें उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य शामिल हैं। पुरुषों की बात करें तो तंबाकू सेवन में हल्की गिरावट आई है-38% से घटकर 36.3% हो गया है। इसके बावजूद कुछ राज्यों में यह दर अभी भी बहुत अधिक बनी हुई है।
शराब सेवन में बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार देश में पुरुषों के बीच शराब पीने की आदत में हल्की बढ़ोतरी हुई है-18.7% से बढ़कर 18.9%। कई राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में यह वृद्धि अधिक देखी गई है। महिलाओं में शराब सेवन में मामूली गिरावट आई है, लेकिन कुछ राज्यों में यह फिर भी बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों की चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय औसत देखकर पूरी तस्वीर नहीं समझी जा सकती। कई राज्यों और जिलों में स्थिति काफी गंभीर है, इसलिए स्थानीय स्तर पर अलग-अलग रणनीति की जरूरत है।
तंबाकू से होने वाले नुकसान
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तंबाकू से होने वाली मौतों में लगभग 48% मौतें दिल की बीमारियों (Heart Disease, Stroke) की वजह से होती हैं।
इसके अलावा:
-मुंह का कैंसर भारत में बहुत अधिक है।
-तंबाकू से जुड़े कैंसर कुल कैंसर मामलों का लगभग 27–30% हैं।
-सांस की बीमारियां भी बड़ी वजह हैं।

रिपोर्ट से साफ है कि पुरुषों में शराब की आदत बढ़ रही है। महिलाओं में तंबाकू उपयोग खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है। कुछ राज्यों में स्थिति राष्ट्रीय औसत से ज्यादा खराब है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ नीति को राज्य और जिला स्तर पर मजबूत और अलग-अलग रणनीति के साथ लागू करना जरूरी है।