Dollar vs Rupees: रुपया गिरा, इतने का हुआ अब 1 डाॅलर, सरकार ने जारी किया अहम बयान

Edited By Updated: 08 Sep, 2025 07:41 AM

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में रुपये की कमजोर होती स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार रुपये की गिरावट पर पूरी

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में रुपये की कमजोर होती स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार रुपये की गिरावट पर पूरी सतर्कता से नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि रुपये की कमजोरी केवल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले है, बल्कि विश्व स्तर पर कई अन्य मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।

निर्मला सीतारमण ने एक साक्षात्कार में कहा कि डॉलर की मजबूती का असर ग्लोबल बाजारों में व्यापक रूप से महसूस किया जा रहा है, इसलिए केवल रुपया ही नहीं, कई मुद्राओं का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस स्थिति को लेकर पूरी तरह से सचेत है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट और RBI का हस्तक्षेप
पिछले शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दिन के दौरान 88.38 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया था। हालांकि, दिन के अंत तक यह 88.09 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी आयात शुल्क को मुख्य वजह माना जा रहा है, जिससे निवेशकों और व्यापारियों में बेचैनी बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस स्थिति को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया, जिससे रुपये की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला।

अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत आयात शुल्क का प्रभाव
अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत से आने वाले कई वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लागू किया है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक आयात शुल्कों में से एक है। इसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का जुर्माना भी शामिल है। इस शुल्क के चलते भारत के कपड़ा, वस्त्र, रत्न-आभूषण, झींगा, चमड़ा, जूते, पशु उत्पाद, रसायन, और विद्युत एवं यांत्रिक मशीनरी जैसे कई महत्वपूर्ण निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, फार्मा, ऊर्जा उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ प्रमुख क्षेत्रों को इस आयात शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है।

भारत-अमेरिका व्यापार का बड़ा आंकड़ा
2024-25 के वित्तीय वर्ष में भारत के कुल वस्तु निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका के लिए था, जो करीब 437.42 अरब डॉलर के आसपास था। इस कारण भी अमेरिका के आयात शुल्क का भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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