Edited By Ramkesh,Updated: 26 Jul, 2026 06:33 PM

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार कर हड्डियां फेंकने के आरोप में जेल में बंद युवक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि गंगा नदी पर किसी को भी चिकन खाने...
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार कर हड्डियां फेंकने के आरोप में जेल में बंद युवक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि गंगा नदी पर किसी को भी चिकन खाने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है। भोपाल में नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में जस्टिस जीपी सिंह के चौथे मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया कि युवाओं को ऐसी चीज के लिए तीन महीने जेल में बिताने पड़े जो कोई अपराध नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत के विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होने चाहिए जहां छात्र इन सभी मुद्दों पर आलोचनात्मक सोच और शोध कर सकें, न कि उनके ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई की जाए उन्होंने कहा, "मुझे पूरा यकीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। गंगा नदी पर चिकन खाने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है सिर्फ इसी वजह से उन्हें गिरफ़्तार किया गया और उन्हें तीन महीने जेल में रहना पड़ा। मुस्लिम छात्रों की गिरफ्तारी की जस्टिस उज्जल भुइयां ने खूब आलोचना की।
आप को बता दें कि वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार कर हड्डियां फेंकने के आरोपियों14 में आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। आठ आरोपियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी जबकि शेष आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी