भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने के लिए बातचीत पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए: उमर अब्दुल्ला

Edited By Updated: 02 Jul, 2026 05:46 PM

omar abdullah no one should object to india pakistan peace talks

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से होने वाली बातचीत पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अब्दुल्ला ने यहां एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बात करते...

नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से होने वाली बातचीत पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अब्दुल्ला ने यहां एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संघर्ष नया नहीं है और यह पिछले तीन-चार दशक से जारी है। अब्दुल्ला ने कहा, "यह संघर्ष 30-40 साल पुराना है, और पिछले साल पहलगाम हमले के बाद यह और बढ़ गया। अब एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि दोनों देशों के संबंधों में सुधार होना चाहिए। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।"

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'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' के अध्यक्ष ओपी शाह द्वारा समन्वित और 61 भारतीयों व 55 पाकिस्तानियों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र में दोनों देशों से द्विपक्षीय वार्ता करने का आग्रह किया गया है। इस पहल की आलोचना करने वालों पर सवाल उठाते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेताओं ने भी भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधारने की वकालत की है। उन्होंने कहा, "हाल में आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए और मित्र बनना चाहिए। जब आरएसएस यह कहता है तो कोई आपत्ति नहीं जताता, लेकिन जब जम्मू-कश्मीर के नेता यही बात कहते हैं तो मुद्दा बन जाता है।"

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अब्दुल्ला ने कहा, "हम वही कह रहे हैं जो (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी) वाजपेयी कहा करते थे कि मित्र बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदले जा सकते। हम चाहते हैं कि पड़ोसियों के संबंध बेहतर हों।" जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय संवाद शुरू करने और सामान्य संबंध बहाल करने का आग्रह किया है। हस्ताक्षरकर्ताओं में रॉ के पूर्व प्रमुख ए. एस. दुलत, राज्यसभा सदस्य मनोज झा, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कई सेवानिवृत्त राजनयिक व गणमान्य नागरिक शामिल हैं। पत्र में दोनों सरकारों से "दक्षिण एशिया में शांति, सामान्य स्थिति, संवाद और सहयोग बहाल करने की दिशा में सार्थक और निरंतर कदम उठाने" का आग्रह किया गया है। 

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