SIR विवाद पर 42 पूर्व न्यायाधीशों का निर्वाचन आयोग के समर्थन में खुला पत्र, बोले- ‘अब चुप रहना भी तटस्थ विकल्प नहीं’

Edited By Updated: 08 Oct, 2026 06:47 PM

open letter from 42 former judges supporting the election commission amidst the

बयालीस सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक समूह ने विपक्ष के हमले के बीच निर्वाचन आयोग का बचाव किया है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए इसे कानून के अनुरूप प्रक्रिया बताया है। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों तथा...

नई दिल्ली: बयालीस सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक समूह ने विपक्ष के हमले के बीच निर्वाचन आयोग का बचाव किया है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए इसे कानून के अनुरूप प्रक्रिया बताया है। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों ने 'भारत की जनता' को लिखे खुले पत्र में कहा कि वे किसी राजनीतिक दल का पक्ष नहीं लेते, लेकिन उन्हें बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि ''अब चुप रहना भी तटस्थ विकल्प नहीं है।

पूर्व न्यायाधीशों ने दावा किया कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं को ''लगातार निशाना'' बनाया जा रहा है और इस हमले के केंद्र में भारत निर्वाचन आयोग है। पत्र में कहा गया है, ''यहां तक कि जिस उच्च न्यायपालिका का हम बहुत सम्मान करते हैं और वैधानिक एजेंसियों को भी नहीं बख्शा गया है।'' उन्होंने कहा कि ये हमले तर्कपूर्ण आलोचना नहीं, बल्कि निहित राजनीतिक हितों से प्रेरित एक ''सोचा-समझा अभियान'' प्रतीत होते हैं, जिसमें ''दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अस्थिर करने'' के संभावित गंभीर परिणामों की बहुत कम परवाह की गई है। पूर्व न्यायाधीशों ने निर्वाचन आयोग और अन्य संस्थाओं पर किए जा रहे हमलों को ''बिना सबूत चलाया जा रहा अभियान'' बताया। 

उन्होंने कहा, ''संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं। संवैधानिक प्राधिकारियों को अब सार्वजनिक मंचों से ''चोर'', ''कठपुतली'' और ''समझौता कर चुके'' जैसे नाम दिए जा रहे हैं।'' एसआईआर के संबंध में पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि मतदाता कानून, आयोग को किसी भी समय मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि पहले आम चुनाव के बाद से कई बार एसआईआर किया जा चुका है और इस तरह की पिछली कवायद लगभग दो दशक पहले पूरी हुई थी। उन्होंने कहा, ''किसी ने भी पुनरीक्षण की उन कवायद को साजिश करार नहीं दिया था।'' विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करने का आरोप लगाया है और उनके इस्तीफे की मांग की है। भाजपा और निर्वाचन आयोग दोनों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। 
 

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