Edited By Parveen Kumar,Updated: 07 May, 2026 08:36 PM

भारतीय सेना ने बृहस्पतिवार को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि नियंत्रण रेखा के पार कोई भी आतंकी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और भारत अपनी इच्छानुसार समय और तरीके से हर आतंकी ढांचे को निशाना बनाएगा।
नेशनल डेस्क : भारतीय सेना ने बृहस्पतिवार को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि नियंत्रण रेखा के पार कोई भी आतंकी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और भारत अपनी इच्छानुसार समय और तरीके से हर आतंकी ढांचे को निशाना बनाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने पर भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना के सैन्य अभियानों के प्रमुखों ने जयपुर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इस अभियान को सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को दंडित करने के वास्ते पिछली आधी सदी में भारत का सबसे व्यापक सैन्य अभियान बताया गया।
सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, ''नियंत्रण रेखा के उस पार कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। हम हर जगह हमला करेंगे। हम हर निशाने पर प्रहार करेंगे। हम हर उस चीज़ के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, यह बात प्रधानमंत्री ने पिछले साल साफ कर दी थी। लेकिन इसकी शर्तें, समय और तरीका हमारा होगा।'' उन्होंने कहा कि आतंकी ढांचे को निशाना बनाने का समय और तरीका भारतीय सेना के विवेक पर निर्भर करेगा। भारतीय सेना के सैन्य अभियानों के महानिदेशक के रूप में, घई ने भारतीय वायु सेना और नौसेना के अपने समकक्षों के साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान में सेना के उप प्रमुख (रणनीति) के रूप में कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था, बल्कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी।''
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पिछले साल सात मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। इसके तहत भारत ने पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 100 आतंकी मारे गए। इस कार्रवाई से पाकिस्तान के साथ तनाव में तेजी से वृद्धि हुई और पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकांश को भारतीय सेना ने विफल कर दिया। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के साथ ही सैन्य संघर्ष समाप्त हो गया, लेकिन इस घटना ने भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर कर दिया।
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि कई आतंकी शिविरों को सीमा क्षेत्र से हटाकर अंदरूनी इलाकों में स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन दूरी भारत की सटीक मारक क्षमता से सुरक्षा नहीं दे सकती। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के बाद संघर्ष को तुरंत समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा, ''दुनिया भर में लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के इस दौर में हमने कड़ा प्रहार किया, स्पष्ट रूप से तय उद्देश्यों को हासिल किया और फिर संघर्ष समाप्त करने का फैसला किया, जब पाकिस्तान बातचीत करने पर मजबूर हो गया और उसने हमसे कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया।''
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों, स्वदेशी निगरानी और लक्ष्यीकरण प्रणालियों और गोला-बारूद का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्म की क्षमताओं को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था। यह तो बस शुरुआत थी। आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी। एक साल बाद, हम न केवल ऑपरेशन को बल्कि इसके पीछे के सिद्धांत को भी याद करते हैं। भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा दृढ़तापूर्वक, पेशेवर ढंग से और पूरी जिम्मेदारी के साथ करेगा।''
ऑपरेशन सिंदूर के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वायु सेना महानिदेशक ए. के. भारती ने वांछित परिणाम हासिल करने में "वायु शक्ति की प्रधानता" पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है और भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने कहा, "हम उनकी हर गतिविधि पर लगातार नज़र रख रहे हैं।" भारती ने कहा, "हमने उनके नौ आतंकवादी शिविरों पर हमला कर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसका सबूत सबके सामने है। हमने उनके 11 हवाई अड्डों पर हमला किया। हमने उनके 13 विमानों को ज़मीन पर या हवा में नष्ट कर दिया, जिनमें 300 किलोमीटर से अधिक की रिकॉर्ड दूरी से नष्ट किया गया एक बहुमूल्य हवाई विमान भी शामिल है।"
भारती ने हालांकि भारतीय वायु सेना के किसी भी नुकसान का उल्लेख नहीं किया। वायु सेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत एयर मार्शल भारती कहा, "वे (पाकिस्तान) हमारी तरफ कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा पाए हैं; न तो कोई सैन्य ढांचा और न ही नागरिक संरचनाओं को कोई बड़ा नुकसान हुआ।" उन्होंने कहा, ''वे चाहे जो भी कहें, याद रखें कि कहानियों और बयानबाजी से जीत नहीं मिलती। जीत ठोस तथ्यों से मापी जाती है।'' वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर अपने उद्देश्यों को हासिल कर लिया। उन्होंने कहा, "जब पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने आतंकवाद का साथ देने और इसे अपनी लड़ाई बनाने का फैसला किया, तो हमारे पास उसी तरह जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
यह आत्मरक्षा का मामला था, जो आतंकवाद विरोधी अभियान से कहीं अधिक था। जब हमने जवाब दिया, तो वह घातक और निर्मम था।" नौसेना संचालन महानिदेशक वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद से निपटने में भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की अग्रिम तैनाती ने पाकिस्तानी नौसेना और वायु इकाइयों को रक्षात्मक मुद्रा अपनाने पर मजबूर कर दिया और इसके चलते पाकिस्तानी नौसेना अधिकांश समय बंदरगाहों तक ही सीमित रही।
उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने इस बात की पुष्टि की कि भारत निरंतर उकसावे का जवाब सोच-समझकर, सटीकता के साथ देने में सक्षम है। इसने यह भी प्रदर्शित किया कि आतंकी ढांचे और उन्हें समर्थन देने वाली सैन्य क्षमताओं को तेज़ी और प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सकता है।'' उन्होंने कहा, ''इस अभियान ने ड्रोन सहित स्वदेशी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, प्लेटफार्मों, प्रणालियों और उपकरणों की निर्णायक भूमिका को भी उजागर किया।'' लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा, ''पाकिस्तान ने 100 से अधिक सैनिक खो दिए। उन नौ आतंकी शिविरों में करीब 100 आतंकवादी मारे गए।'' उन्होंने कहा, ''अनजाने में उनकी पुरस्कार सूची इंटरनेट पर जारी हो गई, जिससे पता चला कि उनमें से कई पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए थे।''