Edited By Tanuja,Updated: 07 May, 2026 05:04 PM

चीन और बांग्लादेश ने बीजिंग वार्ता में व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने साफ कहा कि दक्षिण एशिया में चीन के रिश्ते किसी “तीसरे पक्ष” के खिलाफ नहीं हैं। बयान को भारत और क्षेत्रीय...
International Desk: बीजिंग पहुंचे बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Khalilur Rahman) ने बुधवार को वांग यी के साथ अहम बैठक की। बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित विकास और डिजिटल इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। वार्ता के दौरान वांग यी (Wang Yi ) ने कहा कि चीन के बांग्लादेश और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ संबंध किसी “तीसरे पक्ष” के खिलाफ नहीं हैं और न ही उन्हें किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित होना चाहिए। विशेषज्ञ इस बयान को भारत और दक्षिण एशिया की बदलती रणनीतिक स्थिति के संदर्भ में देख रहे हैं। हाल के महीनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों और सीमाई राजनीति पर काफी चर्चा हुई है।
चीन ने कहा कि वह अपनी हाई-क्वालिटी Belt and Road Initiative को बांग्लादेश की राष्ट्रीय विकास रणनीति के साथ जोड़ना चाहता है। बीजिंग ने ट्रेड, निवेश, जल प्रबंधन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग गहरा करने की बात कही। साथ ही चीन ने अपने उद्योगों को बांग्लादेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने का भी संकेत दिया। बैठक में ग्रीन डेवलपमेंट और डिजिटल इकॉनमी को भविष्य के सहयोग का अहम क्षेत्र बताया गया। चीन ने कहा कि वह बांग्लादेश में नई तकनीकों और आधुनिक आर्थिक परियोजनाओं में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है।
बांग्लादेश ने चीन के “दीर्घकालिक समर्थन” की सराहना करते हुए कहा कि वह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहता है। ढाका ने चीनी कंपनियों को “स्थिर और अनुकूल कारोबारी माहौल” देने का भरोसा भी दिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण एशिया में चीन, भारत और अमेरिका के प्रभाव को लेकर नई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का “तीसरे पक्ष” वाला बयान इस बात का संकेत है कि बीजिंग दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी को सामान्य और सहयोगात्मक रूप में पेश करना चाहता है, जबकि क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।