पीएजीडी के तीखे बोल: हैदरपोरा मुठभेड़ में लोगों की हत्या करने वालों को मिले सजा

Edited By Updated: 19 Nov, 2021 08:21 PM

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गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि हैदरपुरा मुठभेड़ में आम नागरिकों की ''हत्या'' में शामिल ''च्च्दोषी अधिकारियों'' के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और उन्हें दंडित किया जाता है।

श्रीनगर: गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि हैदरपुरा मुठभेड़ में आम नागरिकों की 'हत्या' में शामिल च्च्दोषी अधिकारियोंज्ज् के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और उन्हें दंडित किया जाता है। पीएजीडी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि हैदरपुरा में हुई त्रासदीपूर्ण घटना से लोग बहुत नाराज हैं। इस पत्र को शुक्रवार को मीडिया में जारी किया गया।

 

अब्दुल्ला ने कहा, "इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में तीन आम नागरिक संदेहास्पद परिस्थितियों में मारे गए। इस घटना की निश्चित समय सीमा में जांच की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई का पता चल सके और यह सबके सामने आ सके।"

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पीएजीडी जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के छह राजनीतिक दलों का गठबंधन है, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) शामिल हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने कहा कि इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं जम्मू-कश्मीर के लोगों और भारत सरकार के बीच खाई को और बड़ा कर देती हैं और इसलिए ऐसी घटनाएं किसी कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "हम महामहिम को याद दिलाते हैं कि जम्मू-कश्मीर का प्रशासन एजेंट के तौर पर काम कर रहे उपराज्यपाल द्वारा महामहिम के नाम पर चलाया जा रहा है, इसलिए यह सुनिश्चित करना महामहिम की बड़ी जिम्मेदारी है कि कानून का शासन कायम हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए तथा उन्हें दंडित किया जाए।"

 

उन्होंने इस प्रकार की घटनाओं के पीड़ितों के शवों को उनके परिवार को नहीं सौंपे जाने और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करने के अधिकार से उनके परिवारों को वंचित करने का भी मामला उठाया।

 

अब्दुल्ला ने 18 नवंबर को लिखे गए इस पत्र में कहा, "दुर्भाग्यपूर्ण घटना में भी सुरक्षा बलों ने तीन आम नागरिकों के शवों को ले जाकर उन्हें उनके आवासों से 100 किलोमीटर दूर कथित तौर पर दफनाया।"

 

उन्होंने कहा, "शवों को कानून-व्यवस्था की तथाकथित समस्या समेत किसी भी परिस्थिति में दफनाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी तरह शोक संतप्त परिवारों को भी उनकी धार्मिक प्रथाओं के अनुसार शव को दफनाने का अधिकार है।"

 

हैदरपुरा मुठभेड़ में सोमवार को मारे गए दो आम नागरिकों मोहम्मद अल्ताफ भट और मुद्दसिर गुल के शवों को बृहस्पतिवार को अधिकारियों ने हंदवाड़ा में जमीन से खोदकर बाहर निकाला और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा, ताकि वे उनका अंतिम संस्कार कर सकें।
 

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