मंदिरों के पुजारियों को न्यूनतम वेतन दिलाने वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला- आप इन मामलों में दखल न दें

Edited By Updated: 18 May, 2026 03:20 PM

petition seeking minimum wages for temple priests dismissed supreme court says

उच्चतम न्यायालय ने सरकार नियंत्रित मंदिरों के पुजारियों, सेवादारों और अन्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और अन्य लाभों की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन का अनुरोध करने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।...

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने सरकार नियंत्रित मंदिरों के पुजारियों, सेवादारों और अन्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और अन्य लाभों की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन का अनुरोध करने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर विचार नहीं कर सकती है और पीड़ित व्यक्ति सीधे अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

पुजारियों के मामलों में हस्तक्षेप न करें
न्यायालय ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से कहा कि वह पुजारियों के मामलों में हस्तक्षेप न करें क्योंकि हो सकता है कि उन्हें मंदिरों के पुजारियों और सेवादारों की कमाई के बारे में जानकारी न हो। उपाध्याय ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों के ऐसे फैसले हैं जिनमें सरकार-नियंत्रित मंदिरों के पुजारियों के वेतन की समीक्षा करने की बात कही गई है ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें। पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और उपाध्याय को याचिका वापस लेने की अनुमति दी, साथ ही उन्हें कानून के तहत उपलब्ध उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी दी। 

मंदिर के कर्मचारियों को नहीं मिल रहा सम्मानजनक वेतन
वकील अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में केंद्र और राज्यों को सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक और अन्य लाभों की समीक्षा के लिए एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। इस याचिका की पृष्ठभूमि कैसे तैयार हुई इसके बारे में जानकारी देते हुए उपाध्याय ने कहा कि चार अप्रैल को जब वह एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वाराणसी गए थे, तब राज्य सरकार नियंत्रित काशी विश्वनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक करने के बाद उन्हें पता चला कि पुजारियों और मंदिर के कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन यापन के लिए न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जाता है।

यह एक व्यवस्थित शोषण
याचिका में कहा गया, ''हाल में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को सरकार द्वारा अकुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। यह एक व्यवस्थित शोषण है। राज्य बंदोबस्ती विभाग के माध्यम से एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य कर रहा है, लेकिन न्यूनतम मजदूरी अधिनियम और राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों (अनुच्छेद 43) का उल्लंघन कर रहा है।

न्यूनतम वेतन देने से इनकार 
याचिका में कहा गया है कि 2026 के मुद्रास्फीति-समायोजित जीवन यापन लागत सूचकांक के अनुरूप न्यूनतम वेतन देने से लगातार इनकार करने के कारण याचिकाकर्ता को पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के और अधिक "हाशिए पर धकेले जाने" को रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 

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