Edited By Sahil Kumar,Updated: 27 Oct, 2026 02:14 PM

रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को 2.12 लाख करोड़ रुपये की लागत से सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियारों की खरीद को मंजूरी दी जिनमें बहु-उपयोगी हल्के हेलीकॉप्टर, लंबी दूरी की कामिकेज ड्रोन और रडार भी शामिल हैं। सैन्य खरीद पर निर्णय लेने वाली रक्षा मंत्रालय की...
नई दिल्लीः रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को 2.12 लाख करोड़ रुपये की लागत से सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियारों की खरीद को मंजूरी दी जिनमें बहु-उपयोगी हल्के हेलीकॉप्टर, लंबी दूरी की कामिकेज ड्रोन और रडार भी शामिल हैं। सैन्य खरीद पर निर्णय लेने वाली रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च इकाई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लगभग 2,12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विभिन्न पूंजीगत खरीद प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' या सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सेना के लिए भारी वाहन, 'सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम' (टैंक), 'गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम' (जीएसआरएस), बहु-उपयोगी हल्के हेलीकॉप्टर (एलएमआरएच), बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और जवाबी-मानवरहित हवाई प्रणाली (सी-यूएएस) की खरीद को मंजूरी दी गई है।
डीएसी ने सेना के लिए अन्य मानवरहित हवाई प्रणालियों, टोही मानवरहित वायुयान, एकीकृत निगरानी और हमला प्रणालियों, तथा लंबी दूरी की कामिकेज ड्रोन प्रणाली की खरीद को भी मंजूरी दी। भारी वाहनों से अभियानगत क्षमताएं, साजोसामान सहायता पहुंचाने और दुर्गम इलाकों में आवाजाही और बेहतर होने की उम्मीद है, जबकि 'सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम' गतिशीलता और गोलाबारी की क्षमता को बढ़ाएगी। मंत्रालय ने कहा कि एलएमआरएच का इस्तेमाल थलसेना और वायुसेना, दोनों ही कई तरह के उद्देश्यों के लिए करेंगी, जिनमें टोह लेना और निगरानी करना, युद्ध, सैनिकों की खोज और बचाव, मानवीय सहायता तथा आपदा राहत शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली नयी पीढ़ी के छोटे पैमाने के हवाई खतरों से निपटेगी, जबकि जवाबी-मानवरहित हवाई प्रणाली आधुनिक युद्धक्षेत्र में टैंकों के बचाये रखेगा। टोही और ड्रोन प्रणालियां भारतीय सेना की निगरानी और लक्ष्य साधने की क्षमताओं को बेहतर बनाएंगी। भारतीय नौसेना के लिए, 'एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम और अन्य प्रमुख नौसैन्य प्लेटफॉर्म की खरीद को मंजूरी दी गई। यह मिसाइल रोधी रक्षा की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा, खासकर दुश्मनों की आधुनिक पोत रोधी मिसाइलों के खिलाफ।
मंत्रालय ने कहा कि स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित किए गए प्रमुख नौसैन्य प्लेटफॉर्म आधुनिक युद्ध क्षमताओं से लैस होंगे और नौसेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाएंगे। डीएसी ने सेना की वायु रक्षा और युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए हेलीकॉप्टरों, वायु रक्षा प्रणालियों, हथियारों और मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार प्रणाली की खरीद को मंजूरी दी। लगभग 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी।