खांसी की दवा पीने से 5 साल के मासूम की मौत: कई लोग बीमार, सरकार ने कफ सिरप पर लगाई रोक

Edited By Updated: 30 Sep, 2025 09:37 AM

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राजस्थान में सरकारी निःशुल्क दवा योजना के तहत वितरित की जा रही खांसी की दवा को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। सीकर जिले के खोरी ब्राह्मणान गांव में एक 5 साल के मासूम की मौत इस सिरप के सेवन के बाद हो गई, जबकि भरतपुर जिले में भी इसी दवा के चलते कई...

नेशनल डेस्क: राजस्थान में सरकारी निःशुल्क दवा योजना के तहत वितरित की जा रही खांसी की दवा को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। सीकर जिले के खोरी ब्राह्मणान गांव में एक 5 साल के मासूम की मौत इस सिरप के सेवन के बाद हो गई, जबकि भरतपुर जिले में भी इसी दवा के चलते कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तत्काल प्रभाव से इस दवा के सभी बैच की आपूर्ति और उपयोग पर रोक लगा दी है और जांच के आदेश जारी किए हैं।

सीकर में मासूम की मौत
सीकर जिले के खोरी ब्राह्मणान गांव के रहने वाले मुकेश शर्मा के 5 वर्षीय बेटे नितियांस को बीते रविवार को खांसी की शिकायत पर चिराना स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से दवा दी गई थी। सिरप पीने के बाद रात को बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने पानी पिलाकर राहत देने की कोशिश की, लेकिन सोमवार सुबह जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम के लिए परिजनों ने इनकार कर दिया और पुलिस को सूचना देने के बाद शव घर ले गए। एएसआई रोहिताश कुमार जांगिड़ ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि परिजनों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पोस्टमार्टम नहीं कराने का निर्णय लिया।

भरतपुर में डॉक्टर व ड्राइवर भी चपेट में
भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में भी इसी खांसी के सिरप को पीने के बाद एक तीन साल का बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचा। सिरप पीते ही उसकी हार्टबीट असामान्य रूप से बढ़ गई और वह बेहोश हो गया। इसके बाद मामले की जांच के लिए सीएचसी प्रभारी और दो एम्बुलेंस ड्राइवरों ने खुद यह सिरप पीकर परीक्षण किया, जिसके बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। इन सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दवा पर सरकार ने लगाई तत्काल रोक
दोनों जिलों से मिल रही गंभीर शिकायतों के बाद राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम (आरएमएससीएल) ने खांसी की दवा के सभी 19 बैच पर तत्काल रोक लगा दी है। इन बैचों को बाजार और सभी स्वास्थ्य केंद्रों से हटाकर जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं। सिरप पीने से मरीजों में उल्टी, चक्कर आना, बेचैनी, गहरी नींद आना, घबराहट और बेहोशी जैसे लक्षण सामने आए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री और प्रशासन गंभीर
राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सीकर और भरतपुर दोनों जिलों में सामने आए मामलों को गंभीरता से लेते हुए आरएमएससीएल को जांच और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने जानकारी दी कि संबंधित औषधि नियंत्रण अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि दवा के बैच का विधिक नमूना लेकर जांच के लिए भेजा जाए ताकि सटीक कारण का पता चल सके।

सरकारी अस्पतालों में वितरित की जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर माता-पिता के मन में डर बैठ गया है। सरकार की ओर से भले ही जांच का आश्वासन दिया गया हो, लेकिन एक मासूम की जान जाने और कई लोगों के बीमार पड़ने के बाद यह मुद्दा अब जन-स्वास्थ्य की बड़ी चिंता बन गया है।

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