6 साल से एक्सप्रेसवे के नीचे दफन टिल्लू? दौसा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, NHAI को लिखा गया लेटर, सड़क तोड़ने की तैयारी

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 03:52 PM

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राजस्थान के दौसा जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने रिश्तों से भरोसा उठा दिया है। करीब 6 साल पहले लापता हुए 4 साल के मासूम टिल्लू उर्फ प्रिंस की हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस अब उस जगह की खुदाई कर रही है...

नेशनल डेस्क: राजस्थान के दौसा जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने रिश्तों से भरोसा उठा दिया है। करीब 6 साल पहले लापता हुए 4 साल के मासूम टिल्लू उर्फ प्रिंस की हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस अब उस जगह की खुदाई कर रही है जहां आज देश का सबसे आधुनिक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे गुजरता है।

अपनों ने ही बुना था मौत का जाल
साल 2020 में जो बच्चा घर के आंगन से अचानक आंखों के आगे से ओझल हो गया था, उसकी तलाश अब कंक्रीट के भारी-भरकम हाईवे के नीचे हो रही है। पुलिस ने हाल ही में प्रिंस के दो रिश्तेदारों, कृष्णा और अनिल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में जो सच सामने आया उसने सबको चौंका दिया। आरोपियों ने कबूल किया है कि आपसी रंजिश के चलते उन्होंने मासूम की हत्या की और उसके शव को एक्सप्रेस-वे के निर्माण स्थल के पास दफना दिया था। हैरानी की बात यह है कि हत्या करने के बाद ये आरोपी सालों तक परिवार के साथ मिलकर बच्चे को ढूंढने का नाटक करते रहे और हमदर्दी जताते रहे।

एक्सप्रेस-वे पर चल रही है 'न्याय की खुदाई'

पुलिस और NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की संयुक्त टीम पिछले दो दिनों से आरोपियों द्वारा चिन्हित जगहों पर जेसीबी मशीनों से खुदाई कर रही है।

  • चुनौती: 6 साल में इलाके का भूगोल पूरी तरह बदल चुका है। हाईवे निर्माण के कारण मिट्टी का भारी भराव और कटान हुआ है।

  • अब तक की कार्रवाई: 24 और 25 फरवरी को घंटों चली खुदाई के बावजूद अभी तक शव के अवशेष नहीं मिले हैं।

  • बड़ा कदम: पुलिस अब एक्सप्रेस-वे के कुछ हिस्से को तोड़ने की तैयारी में है, ताकि आरोपियों द्वारा बताए गए सटीक स्थान तक पहुंचा जा सके। इसके लिए NHAI को औपचारिक पत्र भेजा जा चुका है।

पिता की छह साल की तपस्या और 10 लाख का खर्च

प्रिंस के पिता जगमोहन, जो दुबई में मजदूरी करते हैं, इस खबर को सुनते ही तुरंत वतन लौट आए हैं। उन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े को खोजने के लिए पिछले 6 साल में अपनी जमा-पूंजी के करीब 10 लाख रुपये खर्च कर दिए। दर-दर की ठोकरें खाने और कोर्ट के चक्कर लगाने के बाद, अब उन्हें उम्मीद है कि कम से कम उनके बेटे के अवशेष मिल सकेंगे ताकि वह उसे सम्मानजनक विदाई दे सकें।

हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से पलटा मामला

यह केस 16 अगस्त 2020 को दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस की ढीली कार्रवाई के चलते फाइल लगभग बंद हो चुकी थी। 2021 में परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू की और संदिग्ध रिश्तेदारों पर शिकंजा कसा, जिससे इस जघन्य अपराध की परतें खुलीं।

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