Edited By Rohini Oberoi,Updated: 07 May, 2026 03:56 PM

राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) में 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े मामले में बृहस्पतिवार को पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी भारतीय...
नेशनल डेस्क। राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) में 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद हुई है। राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रहे जोशी को गिरफ्तारी के बाद एक अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 11 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इसी कथित घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में जोशी को गिरफ्तार किया था। वह करीब सात महीने तक जेल में रहे जिसके बाद दिसंबर में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। अधिकारियों के अनुसार जोशी को बृहस्पतिवार तड़के जयपुर में स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया।
एसीबी के प्रवक्ता के अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) सुबह करीब पांच बजे जोशी के आवास पर पहुंचा और 'जल जीवन मिशन' के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्हें एसीबी कार्यालय लाया गया और औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत ले जाते समय जोशी ने पत्रकारों से कहा कि एसीबी ने उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया और सुबह उनके आवास पर पहुंच गई।
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जोशी ने कहा कि वह निर्दोष हैं और उन्होंने अपने खिलाफ की गई इस कार्रवाई को "क्रूर" बताया। जोशी ने कहा, "इससे ज़्यादा क्रूर कुछ नहीं हो सकता। मैं निर्दोष हूं। आज मेरी शादी की सालगिरह है और सरकार ने मेरी पत्नी को इस तरह दुख दिया है।" उन्होंने कहा कि "सच परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।"
हालांकि, जोशी ने इस घोटाला मामले पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मैं निर्दोष हूं।" एसीबी के अनुसार जोशी पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया और ठेका देने के बदले रिश्वत ली। एसीबी ने 2024 के अंत में पूर्व मंत्री और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में अधिकारियों और ठेकेदारों समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि तीन अन्य आरोपी अब भी फरार हैं।
इस मामले के सिलसिले में पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुबोध अग्रवाल को 10 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पहले कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों को गिरफ्तार किया गया था। एसीबी के प्रवक्ता ने बताया कि अब तक पूर्व मंत्री समेत कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि कुछ कंपनियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से जाली 'प्रमाणपत्र' जमा करके ठेके हासिल किए थे।