RJD में तेजस्वी यादव की ताजपोशी पर रोहिणी यादव ने भाई को 'कठपुतली शहजादा' कहकर कसा तंज

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 05:00 PM

rjd family war rohini slams tejashwi as puppet prince after elevation

RJD की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के साथ-साथ परिवार और पार्टी के भीतर का घमासान भी अब सड़क पर आ गया है। 25 जनवरी 2026 को तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने मोर्चा खोल दिया है। रोहिणी के तीखे हमलों ने यह...

नेशनल डेस्क: RJD की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के साथ-साथ परिवार और पार्टी के भीतर का घमासान भी अब सड़क पर आ गया है। 25 जनवरी 2026 को तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने मोर्चा खोल दिया है। रोहिणी के तीखे हमलों ने यह साफ कर दिया है कि लालू प्रसाद यादव की विरासत संभालने की इस 'ताजपोशी' से परिवार के सभी सदस्य खुश नहीं हैं। 1997 में पार्टी की स्थापना के बाद से लालू प्रसाद यादव ही अध्यक्ष थे, लेकिन अब आधिकारिक तौर पर कमान तेजस्वी यादव के हाथों में है।

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रोहिणी आचार्य ने लगाए 3 बड़े आरोप

पार्टी की आधारिक तौर पर कमान संभालने के बाद रोहिणी आचार्य के 3 बड़े आरोप लगाए हैं। रोहिणी ने तेजस्वी का नाम लिए बिना उन्हें "शहजादा" और "गिरोह-ए-घुसपैठ" की "कठपुतली" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब उन लोगों के इशारों पर चल रही है जो 'लालूवाद' को खत्म करना चाहते हैं। रोहिणी ने सवाल उठाया कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी की दुर्गति करने वाले "आयातित गुरुओं" (बाहरी सलाहकारों) पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने पूछा कि चुनाव में हार के बाद बनाई गई समीक्षा रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? रोहिणी के अनुसार, जिन लोगों ने पार्टी को बर्बाद किया, उन्हें ही सर्वेसर्वा बना दिया गया है।

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रोहिणी को मिला तेज प्रताप यादव का समर्थन

विवाद तब और बढ़ गया जब तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने भी अपनी बहन के स्टैंड का समर्थन किया। तेज प्रताप ने रोहिणी की पोस्ट को '100 % सही' बताते हुए उन "जयचंदों" पर निशाना साधा जो पार्टी को भीतर से कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपने पिता के निर्णय का सम्मान करने की बात भी कही।

रोहिणी का दावा

माना जा रहा है कि रोहिणी का इशारा तेजस्वी के उन करीबी सलाहकारों की ओर है, जो पिछले कुछ सालों से पार्टी की रणनीति तय कर रहे हैं। रोहिणी का दावा है कि ये "घुसपैठिए" पुराने और समर्पित 'लालूवादियों' को नजरअंदाज कर पार्टी पर कब्जा जमाए हुए हैं।

 

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