Edited By Radhika,Updated: 28 May, 2026 03:48 PM

पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में आई भारी गिरावट को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासनिक हलकों से पुलिस जवानों के लिए जारी की गई एक कथित आंतरिक हिदायत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस हिदायत में पुलिसकर्मियों को...
नेशनल डेस्क: पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में आई भारी गिरावट को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासनिक हलकों से पुलिस जवानों के लिए जारी की गई एक कथित आंतरिक हिदायत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस हिदायत में पुलिसकर्मियों को अकेले सफर न करने, सार्वजनिक स्थानों पर वर्दी पहनने से बचने, दोपहिया वाहनों का उपयोग न करने और सुरक्षा के लिहाज से केवल सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने की सलाह दी गई है। इस एडवाइजरी के सामने आने के बाद अब आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे लेकर BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने ट्वीट कर आप सरकार को घेरा है।
डरी हुई पुलिस का मतलब - डरा हुआ पंजाब
राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब समाज और जनता की रक्षा करने वाला पुलिस बल खुद ही टारगेटेड (लक्षित) हमलों के खौफ में जीने को मजबूर हो जाए, तो यह राज्य की कानून-व्यवस्था की भयावह स्थिति को दर्शाता है। विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार के दावों के विपरीत पंजाब आज गैंगवार, आतंकी खतरों और दिनदहाड़े होने वाली हत्याओं के कारण डर और असुरक्षा के माहौल में धकेला जा चुका है।
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हालिया हत्याओं से पुलिस तंत्र के मनोबल को पहुंची चोट
इस सुरक्षा संकट के पीछे हाल ही में हुए कुछ बड़े घटनाक्रमों को जिम्मेदार माना जा रहा है। एएसआई (ASI) जोगा सिंह की निर्मम हत्या ने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया था। जानकारों के मुताबिक, यह केवल एक अधिकारी की हत्या नहीं थी, बल्कि सीधे तौर पर पूरे पुलिस तंत्र के मनोबल और साख पर हमला था। इसके अलावा, कुछ समय पहले गुरदासपुर के दोरंगला बॉर्डर आउटपोस्ट पर पंजाब पुलिस के दो जवानों की हुई हत्या ने भी सीमावर्ती राज्य में सुरक्षा के गहरे संकट को उजागर किया था।
विपक्ष ने किया बड़ा सवाल
सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विरोधियों का कहना है कि जो सरकार सूबे में “बदलाव” का बड़ा वादा करके सत्ता में आई थी, उसने आज पंजाब को अनिश्चितता और भय की ओर धकेल दिया है। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि सुरक्षा बलों को ही अपनी सुरक्षा के लिए अपनी पहचान (वर्दी) छिपानी पड़े और अकेले निकलने में डर लगे, तो फिर सूबे का आम दुकानदार, किसान, छात्र, व्यापारी या रोजाना सफर करने वाला आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा?

जीरो टॉलरेंस नीति की मांग की
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब को इस समय एक बेहद निर्णायक नेतृत्व और गैंगस्टरों व आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की सख्त नीति अपनाने की जरूरत है। राज्य को एक ऐसी सरकार की आवश्यकता है जो अपने सुरक्षा बलों की ढाल बनकर खड़ी हो, न कि स्थिति को और बेकाबू होने दे। राजनीतिक हलकों में अब यह नारा गूंज रहा है कि पुलिस बल की सुरक्षा ही सीधे तौर पर हर नागरिक की सुरक्षा की गारंटी है; क्योंकि एक डरी हुई पुलिस का सीधा मतलब 'डरा हुआ पंजाब' है।