Edited By Sanjeev,Updated: 05 Oct, 2026 03:57 PM

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह महंगी दवाओं की मार झेल रहे मरीजों की मदद करने में नाकाम रही है। उन्होंने अस्पताल की फार्मेसी में दवाओं की कीमतों और पेटेंट वाली कैंसर की दवाओं पर आई रिपोर्ट का हवाला दिया।
नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह महंगी दवाओं की मार झेल रहे मरीजों की मदद करने में नाकाम रही है। उन्होंने अस्पताल की फार्मेसी में दवाओं की कीमतों और पेटेंट वाली कैंसर की दवाओं पर आई रिपोर्ट का हवाला दिया।
उन्होंने X पर लिखा, 'मोदी सरकार की जन-विरोधी नीतियों के कारण, देश भर के मरीज महंगी दवाओं का बढ़ता बोझ झेल रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नीरो की तरह, अपनी ही धुन में मस्त हैं।' उन्होंने आगे लिखा, 'जनता को इस हद तक लूटा जा रहा है कि 74 रुपए का इंजेक्शन 4,980 रुपए में बिक रहा है। उत्तर प्रदेश में मरीजों से हेल्थकेयर के नाम पर 67 गुना ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।'
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार 214 अस्पताल फार्मेसियों की जांच में पाया गया कि ₹74.09 में खरीदे गए पॉलीमिक्सिन-B इंजेक्शन की MRP 4,980.94 रुपए थी। यह तुलना खरीद मूल्य और MRP के बीच है, न कि इस बात का सबूत कि हर मरीज ने कितना भुगतान किया। रमेश ने कहा, 'कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए एक दवा के 21 दिन के कोर्स का खर्च लगभग ₹58,000 आता है। सालाना खर्च लगभग ₹10 लाख तक पहुंच जाता है। यह सिर्फ एक दवा की कीमत के बारे में नहीं, बल्कि 12 साल से सत्ता में रही सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं के बारे में है।' उन्होंने कहा, 'पेटेंट कानून की धारा 92 और 100 जनहित और सरकारी इस्तेमाल के लिए रास्ते देती हैं। मरीजों को अभी तक कोई राहत क्यों नहीं मिली है?'
उन्होंने पत्रिका द्वारा प्रकाशित एक और रिपोर्ट भी शेयर की, जिसमें रिबोसिक्लिब (ribociclib) की कीमत और पेटेंट वाली दवाएं उपलब्ध कराने की सरकार की शक्ति पर केरल हाई कोर्ट के फैसले पर चर्चा की गई थी। रमेश ने लिखा, 'केरल हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि धारा 100 के तहत, सरकार पेटेंट वाली जीवन रक्षक दवाओं का निर्माण कर सकती है या उनके निर्माण के लिए अधिकृत कर सकती है और उन्हें गैर-व्यावसायिक आधार पर जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध करा सकती है। जब कानून रास्ता देता है और हाई कोर्ट ने इसे स्पष्ट कर दिया है, तो जीवन रक्षक दवाएं अभी भी मरीजों की पहुँच से बाहर क्यों हैं? मोदी सरकार को यह बताना चाहिए: जब कानून में मरीजों को राहत देने का तरीका मौजूद है, तो इसमें देरी क्यों हो रही है?'
जयराम ने प्रश्न किया, 'प्रधानमंत्री जी, मरीजों को सस्ती दवाएं कब मिलेंगी? वरना, जैसा कि आपने एक बार कहा था, अब आपका बोरिया-बिस्तर समेटकर जाने का समय आ रहा है।' रमेश ने केंद्र से यह भी पूछा कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के बावजूद मरीजों को सस्ती दवाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं।
पिछले हफ्ते मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों द्वारा दवाओं (कैंसर की दवाओं सहित) की कीमतों में 10 गुना तक बढ़ोतरी पर चिंता जताई और सभी दवाओं पर एक समान 16 प्रतिशत मार्जिन की वकालत की। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र से अस्पतालों द्वारा अपने ही केमिस्ट से दवाएं खरीदने की अनिवार्यता वाले मामले पर गौर करने को कहा और कहा कि इससे आम आदमी को ही नुकसान होता है। कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता से कहा, 'कैंसर की दवा रिटेलर्स को 2,700 रुपए में सप्लाई होने के बावजूद उसकी MRP 27,000 रुपए है।' कोर्ट ने आगे कहा, 'कॉर्पोरेट अस्पताल किसी को नहीं बख्शते। वे तो शव तक को बाहर नहीं ले जाने देते। फार्मा सेक्टर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।'