Edited By Ramanjot,Updated: 27 Jan, 2026 10:26 PM

उत्तराखंड में लंबे समय से हाशिये पर रही समाजवादी पार्टी अब नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने की कोशिश में जुट गई है।
नेशनल डेस्क: उत्तराखंड में लंबे समय से हाशिये पर रही समाजवादी पार्टी अब नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में देवभूमि की राजनीति में धर्म, युवा नेतृत्व और सामाजिक जुड़ाव को केंद्र में रखकर संगठन को खड़ा किया जाएगा।
अखिलेश यादव का बड़ा फैसला, युवा महंत को सौंपी कमान
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तराखंड में पार्टी की जिम्मेदारी 35 वर्षीय महंत शुभम गिरी को सौंप दी है। इस फैसले को संगठन के नए प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। एक साल पहले पार्टी की सभी इकाइयों को भंग करने के बाद से ही नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश चल रही थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
धर्म और युवाओं का संतुलन साधने की कोशिश
उत्तराखंड को धार्मिक पहचान वाला राज्य माना जाता है। इसी सियासी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए सपा ने इस बार ऐसा चेहरा चुना है, जो संत समाज से भी जुड़ा हो और युवाओं में भी स्वीकार्य हो। हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र से आने वाले महंत शुभम गिरी ने संस्कृत में आचार्य और वैदिक शिक्षा प्राप्त की है। वे धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं।
क्यों खास है शुभम गिरी का चयन?
संत समाज में पहचान
- धार्मिक पृष्ठभूमि
- युवाओं से सीधा संवाद
- सामाजिक कार्यों का अनुभव
इन्हीं वजहों से पार्टी को उम्मीद है कि वे उत्तराखंड में संगठन को नई ऊर्जा दे सकते हैं।
पहले धर्म से दूरी, अब बदली रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब तक अखिलेश यादव की राजनीति में धर्म को खुलकर जगह नहीं मिलती थी, लेकिन उत्तराखंड में परिस्थितियां अलग हैं। यहां धर्म को नजरअंदाज कर चुनावी सफलता हासिल करना आसान नहीं माना जाता। ऐसे में हरिद्वार से प्रदेश अध्यक्ष बनाना सपा की बदली हुई सोच को दर्शाता है।
चुनावी इतिहास रहा है सपा के लिए चुनौती
उत्तराखंड बनने के बाद सपा का प्रदर्शन राज्य में लगातार कमजोर रहा है।
- 2002 विधानसभा चुनाव: 63 सीटों पर उम्मीदवार, एक भी जीत नहीं
- 2004 लोकसभा चुनाव: हरिद्वार सीट पर एकमात्र सफलता
- विधानसभा चुनावों में अब तक पार्टी प्रभाव नहीं छोड़ पाई
इसके अलावा रामपुर तिराहा कांड की छाया भी सपा के लिए हमेशा राजनीतिक बाधा बनी रही है।
नई टीम, नई उम्मीदें
हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन सपा ने संगठन को फिर से खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। महंत शुभम गिरी के नेतृत्व में पार्टी धर्म, युवा और सामाजिक मुद्दों को जोड़कर उत्तराखंड में नई राजनीतिक संभावनाएं तलाशने की कोशिश करेगी। अब देखना होगा कि यह प्रयोग सपा को सिर्फ चर्चा दिलाता है या वाकई जमीन पर कोई असर दिखा पाता है।