भारत-ब्रिटेन के वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, मलेरिया रोकने का नया रास्ता खोजा

Edited By Updated: 28 Jul, 2026 07:22 PM

scientists from india and the uk achieve major breakthrough

भारत और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक अहम सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने प्लाज़्मोडियम (Plasmodium) नामक मलेरिया पैदा करने वाले पैरासाइट में एक ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो इसके कोशिका विभाजन (सेल डिवीजन) और तेजी से...

नेशनल डेस्क : भारत और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक अहम सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने प्लाज़्मोडियम (Plasmodium) नामक मलेरिया पैदा करने वाले पैरासाइट में एक ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो इसके कोशिका विभाजन (सेल डिवीजन) और तेजी से फैलने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रोटीन को निशाना बनाकर भविष्य में मलेरिया की अधिक प्रभावी दवाएं विकसित की जा सकती हैं।

मलेरिया दुनिया की सबसे पुरानी और घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। यह हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को प्रभावित करता रहा है और 20वीं सदी तक इंसानों की कुल मौतों में करीब पांच प्रतिशत के लिए जिम्मेदार माना जाता था। इसका कारण बनने वाला प्लाज़्मोडियम पैरासाइट मच्छरों और इंसानों दोनों में जीवित रह सकता है तथा अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता रखता है।

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि Aurora-related Kinase 1 (Ark1) नामक एंजाइम पैरासाइट की कोशिका विभाजन प्रक्रिया का प्रमुख नियंत्रक है। दिल्ली स्थित बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (NII) के वैज्ञानिक डॉ. पुष्कर शर्मा ने बताया कि Ark1 इंसानों और मच्छरों दोनों में पैरासाइट के विभाजन को नियंत्रित करता है। यदि इस एंजाइम की गतिविधि को रोका जा सके, तो पैरासाइट की वृद्धि को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने Ark1 की भूमिका को समझने के लिए पैरासाइट से इस एंजाइम को हटाने का प्रयास किया। हालांकि, प्लाज़्मोडियम का आकार बेहद छोटा होने के कारण इसकी गतिविधियों का अध्ययन करना चुनौतीपूर्ण था।

इस समस्या के समाधान के लिए ब्रिटेन की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज की प्रोफेसर रीता तिवारी की टीम ने अल्ट्रा एक्सपेंशन माइक्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक में कोशिकाओं को उनके सामान्य आकार से लगभग पांच गुना बड़ा किया जाता है, जिससे वैज्ञानिकों को Ark1 को हटाने के प्रभाव का विस्तार से अध्ययन करने में मदद मिली।

अध्ययन में सामने आया कि प्लाज़्मोडियम ठीक उसी समय Ark1 का निर्माण करता है, जब कोशिका विभाजन की आवश्यकता होती है। यह एंजाइम पैरासाइट में स्पिंडल फॉर्मेशन और न्यूक्लियर डिवीजन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जो नई कोशिकाओं के निर्माण और उनके सही विकास के लिए आवश्यक हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के प्रति पैरासाइट का प्रतिरोध (ड्रग रेजिस्टेंस) बढ़ रहा है। डॉ. शर्मा के अनुसार, पहले क्लोरोक्विन और अब आर्टेमिसिनिन जैसी दवाओं के प्रति भी प्रतिरोध के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में नई एंटी-मलेरियल दवाओं का विकास बेहद जरूरी हो गया है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि Ark1 और इससे जुड़े अन्य प्रोटीन भविष्य में नई दवाओं के प्रभावी लक्ष्य (ड्रग टारगेट) साबित हो सकते हैं। अगला चरण Ark1 द्वारा नियंत्रित प्रोटीन नेटवर्क का विस्तृत अध्ययन करना होगा, जिससे यह समझा जा सके कि मलेरिया पैरासाइट अपनी अनोखी कोशिका विभाजन प्रक्रिया को कैसे नियंत्रित करता है।

यह शोध दिल्ली स्थित NII में डॉ. पुष्कर शर्मा की टीम और ब्रिटेन की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रीता तिवारी की टीम के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। दोनों टीमें मलेरिया पैरासाइट के विकास, सिग्नलिंग मैकेनिज्म और उसके संक्रमण फैलाने की प्रक्रिया को समझने पर लंबे समय से काम कर रही हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह शोध भविष्य में मलेरिया के अधिक प्रभावी उपचार और नई दवाओं के विकास का आधार बनेगा।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!