ऐतिहासिक फैसला: CBSE 11वीं-12वीं के सिलेबस से हटाया गए राजद्रोह और तीन तलाक, अब छात्र पढ़ेंगे ये नए कानून

Edited By Updated: 12 Aug, 2025 12:29 PM

sedition and triple talaq removed from cbse 11th 12th syllabus

CBSE ने 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए Legal Studies के सिलेबस में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने का फैसला किया है। अब छात्र पुराने कानूनों जैसे राजद्रोह, धारा 377 और तीन तलाक के बजाय देश के नए कानूनी ढांचे और हालिया बदलावों के बारे में पढ़ेंगे।

नेशनल डेस्क: CBSE ने 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए Legal Studies के सिलेबस में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने का फैसला किया है। अब छात्र पुराने कानूनों जैसे राजद्रोह, धारा 377 और तीन तलाक के बजाय देश के नए कानूनी ढांचे और हालिया बदलावों के बारे में पढ़ेंगे।

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क्यों हो रहा है यह बदलाव?

यह बदलाव केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के बाद किया गया है। BNS, BNSS और BSA ने अब पुराने कानूनों जैसे IPC की जगह ले ली है। इस बदलाव के पीछे का मकसद छात्रों को आधुनिक और मौजूदा कानूनी व्यवस्था से परिचित कराना है।

क्या-क्या हटेगा और क्या जुड़ेगा?

  • क्या हटेगा:
    • राजद्रोह: अंग्रेजों के जमाने का राजद्रोह कानून, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
    • धारा 377: यह कानून समलैंगिकता को अपराध मानता था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी करार दिया था।
    • तीन तलाक: सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिससे मुस्लिम महिलाओं को बड़ी राहत मिली थी।
  • क्या जुड़ेगा:
    • नए कानून: भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के मुख्य प्रावधान।
    • ऐतिहासिक फैसले: सुप्रीम कोर्ट के वे अहम फैसले और कानूनी सिद्धांत, जिन्होंने देश के कानून को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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NEP 2020 के साथ तालमेल

सीबीएसई का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य छात्रों को एक आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा देना है। बोर्ड का मानना है कि इस बदलाव से छात्रों को कानूनी क्षेत्र की सही और अपडेटेड जानकारी मिलेगी, जो उनके भविष्य के लिए फायदेमंद होगी।

कब तक लागू होगा नया सिलेबस?

सीबीएसई के अधिकारियों के मुताबिक यह नया सिलेबस तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी। ज़रूरत पड़ने पर एक कंटेंट डेवलपमेंट एजेंसी की भी मदद ली जाएगी। उम्मीद है कि ये नई किताबें 2026-27 के शैक्षणिक सत्र तक तैयार होकर छात्रों के लिए उपलब्ध हो जाएंगी। यह बदलाव छात्रों को देश के बदलते कानूनी माहौल को समझने में मदद करेगा।

 

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