कांग्रेस के भीतर मतभेद... शशि थरूर ने रणनीतिक बैठक से बनाई दूरी, सामने आई ये बड़ी वजह

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 04:02 PM

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केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में खटास नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान की रणनीतिक बैठक में शशि थरूर शामिल नहीं होंगे। सूत्रों के अनुसार, थरूर को हाल ही में कोच्चि में हुई महापंचायत में मंच पर मौजूद होने के बावजूद उनका नाम नहीं लेने और राज्य...

नेशनल डेस्क : केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर मतभेद नजर आए। पार्टी हाईकमान द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर केरल विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को होने वाली पार्टी की एक रणनीतिक बैठक में शामिल नहीं होंगे क्योंकि वह इस बात से 'आहत' हैं कि राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें 'दरकिनार' करने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

खरगे शुक्रवार को केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर बैठक करेंगे। आगामी मार्च-अप्रैल महीने में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। उन्होंने कहा कि थरूर को अपने साथ किए गए व्यवहार से निराशा हुई, लेकिन अहम बात यह थी कि राहुल गांधी ने 19 जनवरी को कोच्चि में स्थानीय निकाय के चुनाव में जीतने वालों को सम्मानित करने के लिए आयोजित 'महापंचायत' में उनका उल्लेख नहीं किया। 

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सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने मंच पर अन्य वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया और उनके नाम भी लिए, लेकिन चार बार के सांसद और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर का उल्लेख नहीं किया, जबकि वह मंच पर मौजूद थे। हालांकि थरूर के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया है। हालांकि, उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वह पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार से बहुत आहत हैं, जबकि थरूर ने खासकर आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शिविर के मौके पर मतभेद दूर करने का प्रयास किया था। 

उस कार्यक्रम के बाद थरूर ने कहा था कि वह कभी भी पार्टी के रुख से अलग नहीं हटे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। केरल कांग्रेस नेताओं द्वारा वायनाड में आयोजित उस शिविर से आगामी विधानसभा चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मंच (LDF) का मुकाबला करने के लिए एकजुट आह्वान किया गया था। उसमें कथित तौर पर यह सहमति बनी कि थरूर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे। हालांकि, कुछ दिनों बाद राज्य इकाई के भीतर मतभेद फिर से उभर आए हैं और थरूर हाल ही में कोच्चि में अपने साथ किए गए व्यवहार से खुश नहीं हैं।

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थरूर ने पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और केरल प्रभारी दीपा दास मुंशी सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को भी संदेश भेजा है जिसमें उनके साथ हुए ‘गलत व्यवहार' की ओर इशारा किया गया है। थरूर के बयानों और लेखों की हाल के दिनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी आलोचना की थी। पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद राजनयिक संपर्क के प्रयासों को लेकर उनकी टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए उन पर कटाक्ष किया था। हालांकि, थरूर ने कहा है कि विदेश नीति पर रुख में कोई भिन्नता नहीं है।

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