न बादल फटा, न ग्लेशियर टूटा, धराली जलप्रलय की असली वजह आई सामने... 68 लोगों की गई थी जान

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 09:56 PM

the real reason behind the dharali flood has come to light

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में 5 अगस्त 2025 को आए भीषण जलप्रलय की असली वजह अब सामने आ गई है।

नेशनल डेस्कः उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में 5 अगस्त 2025 को आए भीषण जलप्रलय की असली वजह अब सामने आ गई है। लंबे समय से इस आपदा को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी  (ISRO) की नई सैटेलाइट रिसर्च ने इस आपदा का वास्तविक कारण स्पष्ट कर दिया है।

ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों और वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक धराली में आई तबाही न तो बादल फटने से हुई थी और न ही किसी ग्लेशियर झील के फटने से, बल्कि इसकी वजह ग्लेशियर क्षेत्र में मौजूद बर्फ के एक बड़े हिस्से का अचानक नीचे खिसकना था। इस आपदा में करीब 68 लोगों की जान चली गई थी और पूरा धराली कस्बा भारी मलबे के नीचे दब गया था। मंदिर, दुकानें, बाजार और कई घर हजारों टन मलबे में समा गए थे।

श्रीकंठ ग्लेशियर से बर्फ का विशाल हिस्सा गिरने से आई तबाही

ISRO की रिपोर्ट के अनुसार धराली के ऊपर स्थित Shrikant Glacier क्षेत्र में मौजूद बर्फ का एक विशाल हिस्सा अचानक ढह गया था। यह घटना धराली और Harsil क्षेत्र के लिए बेहद विनाशकारी साबित हुई और इसका असर पूरी Bhagirathi Valley में देखा गया। पहले इस आपदा के लिए क्लाउडबर्स्ट (बादल फटना), भारी बारिश या ग्लेशियर झील के फटने को जिम्मेदार बताया जा रहा था, लेकिन नई वैज्ञानिक जांच में यह सभी संभावनाएं गलत साबित हुई हैं।

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न बादल फटा, न ग्लेशियर झील टूटी

ISRO के वैज्ञानिकों — गिरिबाबू दंडबथुला, ओमकार शशिकांत घटगे, शुभम रॉय, अपूर्व कुमार बेरा और सुशील कुमार श्रीवास्तव — की टीम ने विस्तृत अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि यह आपदा एक विशाल आइस-पैच के अचानक ढहने से हुई थी।

यह आइस-पैच धराली से करीब 10 किलोमीटर ऊपर श्रीकंठ ग्लेशियर क्षेत्र में मौजूद था। इसके अचानक गिरने से भारी मात्रा में बर्फ और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहने लगा, जिसने देखते ही देखते विनाशकारी रूप ले लिया।

69 लाख किलो बर्फ ढलान से नीचे गिरी

रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 0.25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला आइस-पैच टूटकर नीचे गिर गया। इसमें करीब 75 हजार घन मीटर बर्फ और मलबा शामिल था, जिसका कुल वजन लगभग 69 लाख किलो आंका गया है। यह विशाल बर्फीला हिस्सा करीब 1.7 किलोमीटर नीचे ढलान की ओर गिरा। नीचे गिरते समय तेज घर्षण के कारण बर्फ तेजी से पिघलकर पानी में बदलती चली गई। तेज रफ्तार से बहता यह पानी और मलबा Kheer Ganga के कैचमेंट क्षेत्र से होकर धराली की ओर आया और कुछ ही समय में भीषण बाढ़ में बदल गया।

सैटेलाइट तस्वीरों से बनाई पूरी टाइमलाइन

ISRO के वैज्ञानिकों ने इस घटना की पूरी जांच के लिए मल्टी-टेम्पोरल सैटेलाइट इमेजरी, हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और स्थानीय वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया। इन सभी डाटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने घटना की पूरी टाइमलाइन तैयार की, जिससे आपदा के असली कारण की पुष्टि हुई।

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रिपोर्ट में सामने आए अहम तथ्य

ISRO की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं:

  • जुलाई 2025 में 5220 मीटर ऊंचाई पर एक बड़ा आइस-पैच दिखाई दिया था, जो पिछले 15 साल के रिकॉर्ड में पहले कभी नहीं देखा गया था।

  • 12 अगस्त की सैटेलाइट तस्वीरों में यह आइस-पैच पूरी तरह गायब हो गया और ढलान पर ताजा कटाव के गहरे निशान दिखाई दिए।

  • भारी हिमखंड करीब 1700 मीटर नीचे खीर गंगा चैनल की ओर गिरा, जिससे तेज रफ्तार वाली मलबे से भरी धारा बन गई।

  • 3 से 5 अगस्त के बीच इलाके में हल्की से मध्यम बारिश हुई थी और क्लाउडबर्स्ट की कोई संभावना नहीं थी।

  • ऊपरी कैचमेंट क्षेत्र में कोई ग्लेशियल झील मौजूद नहीं थी, इसलिए ग्लेशियर झील फटने की संभावना भी नहीं थी।

स्थानीय लोगों के वीडियो से भी मिली पुष्टि

आपदा के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में अचानक तेज रफ्तार से आती मलबा-युक्त लहर दिखाई दी थी। इसके बाद काफी देर तक अपेक्षाकृत कम तीव्रता वाला बहाव जारी रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पैटर्न मास-रिलीज इवेंट यानी किसी बड़े बर्फीले हिस्से के अचानक गिरने से बनने वाली बाढ़ से मेल खाता है, न कि सामान्य मानसूनी बाढ़ से।

आइस-पैच क्या होता है और क्यों खतरनाक है

आइस-पैच ग्लेशियर क्षेत्र में जमा बर्फ का ऐसा बड़ा हिस्सा होता है जो लंबे समय तक स्थिर रहता है, लेकिन तापमान, दबाव या ढलान के कारण अचानक टूट सकता है। जब ऐसा विशाल बर्फीला हिस्सा एक साथ नीचे गिरता है तो तेज घर्षण, पिघलती बर्फ और मलबे के साथ मिलकर यह अचानक फ्लैश फ्लड का रूप ले सकता है, जो पहाड़ी इलाकों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। धराली की यह आपदा भी इसी तरह के आइस-पैच के ढहने से पैदा हुई थी, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को तबाही में बदल दिया।

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