TMC में टूट के संकेत ...अब क्या करेंगी ममता? 58 विधायकों ने बनाया अलग गुट

Edited By Updated: 03 Jun, 2026 04:13 PM

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़े राजनीतिक संकट के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग गुट बनाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। मीडिया...

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़े राजनीतिक संकट के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग गुट बनाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 58 विधायकों के समर्थन के साथ बागी गुट ने खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताया है।

पार्टी नेतृत्व को लेकर विधायकों में नाराजगी 
बताया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी समर्थन पत्र लेकर विधानसभा पहुंचे, जहां बागी विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। बागी विधायक अरुणाभ सेन ने कहा कि वह आज भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते।

ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी समितियों को की भंग 
बागी गुट द्वारा जारी पत्र में भी ममता बनर्जी को ही पार्टी की प्रमुख और सर्वोच्च नेता बताया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि मौजूदा विवाद का केंद्र अभिषेक बनर्जी की भूमिका और नेतृत्व है। इधर पार्टी में बढ़ती बगावत की खबरों के बीच तृणमूल कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए बंगाल में पार्टी की सभी समितियों को भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संगठन पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बागी विधायकों पर दल बदल कानून 
वहीं दल-बदल कानून के तहत किसी भी अलग गुट को वैधता हासिल करने के लिए विधायक दल के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। विधानसभा में TMC के 80 विधायक हैं, ऐसे में 54 विधायकों का समर्थन आवश्यक माना जाएगा। यदि 58 विधायकों के समर्थन का दावा सही साबित होता है, तो बागी गुट खुद को वैध विधायक दल घोषित करने की स्थिति में आ सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह लड़ाई केवल विपक्ष के नेता पद तक सीमित नहीं है, बल्कि असली संघर्ष पार्टी संगठन और चुनाव चिन्ह पर नियंत्रण को लेकर माना जा रहा है।
 

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