Edited By Ramanjot,Updated: 20 Feb, 2026 06:54 PM

पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी टकराव पर कड़ी टिप्पणी की है।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी टकराव पर कड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बन गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह स्थिति बेहद खेदजनक है और संवैधानिक संस्थाओं से बेहतर समन्वय की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में पाई गई तार्किक विसंगतियों से जुड़े दावों और आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश ऐसे सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज स्तर) को नामित करें, जो जिलों में जाकर मामलों की सुनवाई कर सकें। इन अधिकारियों को राज्य प्रशासन द्वारा पहले से नियुक्त कर्मचारियों और माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का सहयोग मिलेगा। अदालत ने माना कि यह असाधारण परिस्थिति है, जिससे न्यायिक कार्य पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन हाईकोर्ट आवश्यक व्यवस्थाएं कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India को 28 फरवरी तक संशोधित मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सूची भी जारी की जा सकेगी। साथ ही दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा कम से कम एक सप्ताह बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि हजारों अधिकारियों का विवरण आयोग को उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं आयोग की ओर से कहा गया कि पर्याप्त ग्रुप-बी स्तर के अधिकारी नहीं मिल पा रहे, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और यह केवल औपचारिक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि न्यायिक जिम्मेदारी जैसा दायित्व है। जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से अधिकारियों की तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है।
एक अन्य न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि आयोग के कुछ अधिकारियों को स्थानीय भाषा की समझ न होने से व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं। अदालत ने दोनों पक्षों से जिम्मेदारी और सहयोग की भावना से काम करने की अपील की।
इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश को राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाने का सुझाव दिया, ताकि समन्वय सुनिश्चित हो सके।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य में लाखों मतदाताओं के नामों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो।