Edited By Anu Malhotra,Updated: 17 Mar, 2026 12:16 PM

राजस्थान में हाईवे के किनारे चमकते शराब के ठेकों के भविष्य पर छाई अनिश्चितता की धुंध फिलहाल छंट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस कड़े फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसने शहरी सीमाओं के भीतर हाईवे पर स्थित 1,102 शराब दुकानों को हटाने...
नेशनल डेस्क: राजस्थान में हाईवे के किनारे चमकते शराब के ठेकों के भविष्य पर छाई अनिश्चितता की धुंध फिलहाल छंट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस कड़े फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसने शहरी सीमाओं के भीतर हाईवे पर स्थित 1,102 शराब दुकानों को हटाने का फरमान सुनाया था। शीर्ष अदालत के इस हस्तक्षेप ने न केवल हजारों लाइसेंसधारकों को राहत दी है, बल्कि राज्य सरकार के खजाने को होने वाले बड़े नुकसान को भी फिलहाल टाल दिया है।
कानूनी रस्साकशी और सरकार का पक्ष
मामला तब गरमाया जब हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हाईवे से 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि राजस्व से ज्यादा कीमती इंसानी जान है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच के सामने राज्य सरकार ने दलील दी कि शहरी नगर पालिका क्षेत्रों से गुजरने वाले हाईवे पर इस तरह की पाबंदी लागू नहीं होनी चाहिए। सरकार ने पिछले उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के मेल नहीं खाता।
फिलहाल 'यथास्थिति' बरकरार
इस कानूनी राहत के बाद अब ये दुकानें अपनी वर्तमान जगहों पर ही चलती रहेंगी। शराब विक्रेताओं के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि अचानक दुकानों को बंद करना या शिफ्ट करना नियमों के विरुद्ध है। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि लोगों की सुरक्षा और कानूनी व्यापार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अगले आदेश तक, गुलाबी नगरी सहित प्रदेश के अन्य शहरों में हाईवे के किनारे शराब का कारोबार अपनी पुरानी रफ़्तार से जारी रहेगा।