Edited By Mehak,Updated: 17 Mar, 2026 02:01 PM

मोबाइल फोन का लगातार इस्तेमाल करने से कई लोग ब्रेन ट्यूमर को लेकर चिंतित हैं। ब्रेन ट्यूमर तब होता है जब दिमाग या उसके आसपास की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, जिससे सिरदर्द, मतली, धुंधला दिखना, कमजोरी और ध्यान कमजोर होना जैसे लक्षण दिखाई...
नेशनल डेस्क : आज के दौर में मोबाइल फोन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। रोज़मर्रा के काम, सोशल मीडिया, पढ़ाई और मनोरंजन के लिए लोग लगातार फोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या लगातार फोन का इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है, खासकर दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों के संदर्भ में।
ब्रेन ट्यूमर क्या है?
ब्रेन ट्यूमर तब होता है जब दिमाग या उसके आसपास की कोशिकाएं असामान्य रूप से तेजी से बढ़ने लगती हैं। यह असामान्य सेल ग्रोथ धीरे-धीरे दिमाग के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। ट्यूमर दिमाग के आसपास के टिश्यू, नसों और ब्लड वेसल्स पर दबाव डाल सकता है, जिससे कई न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
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ब्रेन ट्यूमर दो प्रकार के हो सकते हैं :
- कैंसरयुक्त (Malignant): गंभीर और तेजी से बढ़ने वाले ट्यूमर।
- सौम्य (Benign): गैर-कैंसरस, लेकिन समय पर इलाज जरूरी।
ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। अक्सर लोग इन्हें सामान्य सिरदर्द या थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं। कुछ मुख्य लक्षण हैं:
- लगातार सिरदर्द, खासकर सुबह उठते समय ज्यादा तेज होना।
- बिना कारण बार-बार मतली या उल्टी।
- आंखों में धुंधलापन, डबल विजन या देखने में परेशानी।
- चलने में असंतुलन, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी।
- याददाश्त कमजोर होना या ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल।
- अचानक दौरे पड़ना या बेहोशी।
- व्यवहार, मूड या स्वभाव में असामान्य बदलाव।
इन लक्षणों का मतलब हमेशा ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, लेकिन अगर ये लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच जरूरी है।
मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर का संबंध
मोबाइल फोन से निकलने वाले लो-लेवल रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन के कारण लोग मानते हैं कि इससे ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है। फोन कॉल के दौरान सिर के पास रहने से चिंता होती है। हालांकि अब तक वैज्ञानिकों को ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है जो यह साबित कर सके कि मोबाइल फोन सीधे ब्रेन ट्यूमर का कारण बनता है।
विशेषज्ञों की सलाह
हालांकि प्रमाण नहीं हैं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ एहतियात बरतने की सलाह देते हैं:
- लंबी कॉल के दौरान स्पीकर मोड या ईयरफोन का इस्तेमाल करें।
- फोन को सिर से थोड़ी दूरी पर रखें।
- जरूरत न हो तो मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।
- अगर लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।