पश्चिम बंगाल में DGP नियुक्ति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट  नाराज, राज्य सरकार को लगाई फटकार

Edited By Updated: 12 Mar, 2026 05:57 PM

supreme court slams bengal over delay in dgp appointment

पश्चिम बंगाल में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) के पद पर स्थायी नियुक्ति में लगातार हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) के पद पर स्थायी नियुक्ति में लगातार हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार नियमित डीजीपी नियुक्त करने के बजाय अपने अधिकारियों को राज्यसभा भेजने में अधिक सक्रिय है।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (TMC) ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया और वे निर्विरोध चुने गए।

राजीव कुमार का राज्यसभा तक का सफर

राजीव कुमार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता रहा है। 31 जनवरी 2026 को डीजीपी पद से सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया।

16 मार्च 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए TMC ने जिन चार उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें शामिल हैं:

  • बाबुल सुप्रियो
  • राजीव कुमार
  • मेनका गुरुस्वामी
  • कोएल मल्लिक

राज्य विधानसभा में TMC के मजबूत बहुमत को देखते हुए इन उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं विपक्षी दल Bharatiya Janata Party (BJP) को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अभी कार्यवाहक DGP के भरोसे पुलिस विभाग

राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडे को 31 जनवरी 2026 से राज्य का कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया है। वे इससे पहले महानिदेशक (जेल) के पद पर कार्यरत थे। हालांकि अब तक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिससे यह मुद्दा न्यायालय तक पहुंच गया है।

UPSC ने पैनल वापस लौटाया

मामले में एक और पेच तब आया जब Union Public Service Commission (UPSC) ने राज्य सरकार की ओर से भेजे गए अधिकारियों के पैनल को वापस लौटा दिया। बताया गया कि यह पैनल सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस सुधारों के लिए दिए गए प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामला के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं था।

पुलिस सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कई राज्य सरकारें स्थायी नियुक्ति के बजाय “कार्यवाहक डीजीपी” की व्यवस्था को लंबे समय तक जारी रखती हैं। इससे पुलिस सुधारों की प्रक्रिया कमजोर पड़ती है और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के करियर पर भी असर पड़ता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में UPSC को राज्यों की स्थिति की रिपोर्ट देने और समयसीमा तय करने का अधिकार दिया गया है।

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