‘संतों से मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां खींचना गलत’, अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर स्वामी निश्चलानंद ने सरकार को घेरा

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 07:38 AM

swami nischalanand criticized the govt over avimukteshwaranand controversy

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर हिंदू समाज और साधु-संतों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर खींचने की घटना को लोग अपमानजनक और...

नेशनल डेस्कः शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर हिंदू समाज और साधु-संतों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर खींचने की घटना को लोग अपमानजनक और शर्मनाक बता रहे हैं।

अब इस पूरे विवाद पर पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संतों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।

माघ मेले में दिया बयान

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने माघ मेले में लगे अपने शिविर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि “साधु-संतों से मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर खींचना बिल्कुल गलत है।” उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपना लाडला बताते हुए कहा कि यह नियम सिर्फ शंकराचार्य पर नहीं, बल्कि हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू होता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी को स्नान की मर्यादा का पालन करना चाहिए।

सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ नागा साधुओं पर?

पुरी शंकराचार्य ने शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि “कुंभ में शंकराचार्य स्नान करें या न करें, शासन तंत्र को इससे कोई मतलब नहीं होता। सारा ध्यान सिर्फ नागा साधुओं के स्नान पर रहता है।” उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार को सभी साधु-संतों का ध्यान रखना चाहिए, न कि केवल एक वर्ग पर फोकस करना चाहिए।

शंकराचार्य पद को लेकर भी बोले

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने अपने जीवनकाल में दो दंडी स्वामी बनाए थे। वे भी खुद को ज्योति और द्वारका मठ का शंकराचार्य मानते थे।

संतों के बंटने पर क्या बोले?

जब उनसे पूछा गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर संतों में मतभेद क्यों हैं, तो उन्होंने कहा कि “श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने उनका अभिषेक किया है। द्वारिका पीठ के शंकराचार्य उनके गुरु भाई हैं, इसलिए उन्हें समर्थन मिलना स्वाभाविक है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “जब तक यह मामला मेरे पास औपचारिक रूप से नहीं आएगा, तब तक मैं कोई फैसला नहीं दूंगा। अगर कोर्ट का निर्णय कुछ और आया और मैंने पहले कुछ कह दिया, तो यह मेरे पद का अपमान होगा।” उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यह मामला कोर्ट तक आखिर गया कैसे, इस पर भी सोचने की जरूरत है।

‘शंकराचार्यों के लिए कोई व्यवस्था नहीं’

पुरी शंकराचार्य ने शासन व्यवस्था की एक बड़ी कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि “कुंभ में नागा साधुओं के लिए पूरी व्यवस्था होती है, लेकिन शंकराचार्यों के लिए कोई खास इंतजाम नहीं होता।” उन्होंने कहा कि शंकराचार्य कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भी उपेक्षित रहते हैं, जो बेहद दुखद है।

अविमुक्तेश्वरानंद को सलाह देने की बात

स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनके पास आते, तो वे उन्हें पहले ही बता देते कि क्या करना चाहिए, ताकि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले अविमुक्तेश्वरानंद उनके शिविर के सामने रुके थे और उन्हें दंडवत प्रणाम किया था, लेकिन बातचीत नहीं हो पाई।

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