Edited By Tanuja,Updated: 02 Aug, 2026 05:15 PM

भोपाल की 79 वर्षीय प्रो. स्वर्णलता तिवारी का तीन जन्मों की याद होने का दावा एक बार फिर सोशल मीडिया और गूगल पर चर्चा में है। उनका कहना है कि उनका दूसरा जन्म बांग्लादेश के सिलहट में हुआ था। इस मामले का अध्ययन भारतीय और विदेशी शोधकर्ताओं ने किया, लेकिन...
International Desk: भारत के मध्य प्रदेश राज्य की 79 वर्षीय सेवानिवृत्त बॉटनी प्रोफेसर डॉ. स्वर्णलता तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया और गूगल पर उनकी पुनर्जन्म की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। उनका दावा है कि उन्हें अपने तीन जन्मों की पूरी याद है। खास बात यह है कि उनके अनुसार दूसरा जन्म बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के सिलहट में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जबकि उनके दावों ने वर्षों पहले देश-विदेश के शोधकर्ताओं का भी ध्यान खींचा ।प्रो. स्वर्णलता तिवारी के अनुसार उनका पहला जन्म वर्ष 1900 में मध्य प्रदेश के कटनी के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इसके बाद 1940 में बांग्लादेश (सिलहट) में उनका दूसरा जन्म हुआ, जहां उनका नाम कमलेश गोस्वामी था। सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद वर्ष 1948 में उनका वर्तमान जन्म टीकमगढ़ में हुआ।
स्वर्णलता तिवारी का कहना है कि बचपन से ही उन्हें ऐसे स्थान, लोग और घटनाएं याद आने लगी थीं जिनका उनके वर्तमान जीवन से कोई संबंध नहीं था। बाद में जब उन्होंने इन बातों को विस्तार से बताया तो कई तथ्यों का मिलान किया गया। यह मामला केवल पारिवारिक दावा बनकर नहीं रह गया। पुनर्जन्म पर शोध करने वाले कई भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों ने इस पर अध्ययन किया। अमेरिका के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक और पैरासाइकोलॉजी शोधकर्ता प्रो. इयान स्टीवेंसन, जयपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं तथा अन्य विशेषज्ञों ने उनके दावों की जांच की। इसी कारण यह मामला पुनर्जन्म से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है। पुनर्जन्म की अवधारणा को कई धर्म मान्यता देते हैं, लेकिन मुख्यधारा का विज्ञान अब तक पुनर्जन्म को निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं मानता। इसलिए स्वर्णलता तिवारी का मामला आज भी आस्था, शोध और बहस का विषय बना हुआ है।

मध्य प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. एच.पी. मिश्र ने भी इस मामले में रुचि लेकर कई तथ्यों का सत्यापन कराया था। बताया जाता है कि उनके द्वारा बताए गए कई नाम, स्थान और पारिवारिक विवरण वास्तविक रिकॉर्ड से मेल खाते थे। हालांकि, इन दावों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में आज भी अलग-अलग मत हैं।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्वर्णलता तिवारी आज भी उन परिवारों से संपर्क में हैं, जिनसे वह अपने पिछले जन्मों का संबंध बताती हैं। कटनी के पाठक परिवार सहित कई लोग उन्हें सम्मानपूर्वक 'बड़ी मां' कहकर संबोधित करते हैं और पारिवारिक कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं।