स्विट्जरलैंड का दूल्हा और जर्मनी की दुल्हन ने लिए सात फेरे, बोले- हिंदू धर्म के रीति रिवाजों से हुए प्रभावित

Edited By Updated: 22 Jul, 2024 07:17 PM

swiss groom and german bride get married

मार्टिन और उलरिके की मुलाकात स्पेन की एक यात्रा के दौरान हुई थी। उसके बाद उनके बीच फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से बातें होती रहीं, जिससे उनका दिल आपस में मिल गया। मार्टिन ने अपने गुरु, डॉ. रघुवीर सिंह गौर, से पंच वर्षों से जुड़ा होने का अनुभव...

नेशनल डेस्क: स्विट्जरलैंड के नागरिक मार्टिन और जर्मनी की उलरिके ने भारतीय संस्कृति के वैदिक परंपराओं के माध्यम से अपने प्यार को शादी के बंधन में बांध लिया। इस अद्वितीय समारोह में शिवपुरी के नक्षत्र गार्डन में शादी का सम्पन्न होना भी एक अनुपम घटना थी। इस खास मोमेंट में देश के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु, डॉ. रघुवीर सिंह गौर, ने उनकी मदद की और सभी आयोजनों को संचालित किया।

यात्रा से प्यार की शुरुआत
मार्टिन और उलरिके की मुलाकात स्पेन की एक यात्रा के दौरान हुई थी। उसके बाद उनके बीच फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से बातें होती रहीं, जिससे उनका दिल आपस में मिल गया। मार्टिन ने अपने गुरु, डॉ. रघुवीर सिंह गौर, से पंच वर्षों से जुड़ा होने का अनुभव बताया, जिनके प्रेरणास्पद विचारों ने उन्हें हिंदू धर्म और उसकी संस्कृति में रुचि बढ़ाई। उलरिके ने भी इस प्रक्रिया में भाग लिया और गुरुजी के माध्यम से भारतीय विवाह और संस्कृति के बारे में अधिक जानने का संकल्प लिया।

'टीवी पर हिंदू रीति-रिवाजों से होते विवाह देख हुई थी प्रभावित...'
वहीं, दुल्हन उलरिके का कहना है कि वह सोशल मीडिया के जरिए गुरुजी से जुड़ी। गुरुजी के आध्यात्मिक प्रवचनों से प्रेरित हुई और फिर भारतीय संस्कृति में उनकी रुचि बढ़ गई। उन्होंने कहा कि वह टीवी पर हिंदू रीति रिवाजों से विवाह होते देख वह काफी प्रभावित हुई। जिसके बाद गुरुजी के माध्यम से मार्टिन से स्पेन मुलाकात हुई और गुरुजी की कृपा से दोनों की शादी हो गई।

'मुझसे प्रभावित हुए और फिर मिलने के लिए भारत आए...'
डॉक्टर रघुवीर सिंह गौर ने बताया कि मार्टिन खुद योग गुरु हैं। वह मुझसे प्रभावित हुए और फिर भारत आकर मुझसे मिले। जिसके कुछ समय बाद लड़की भी मिलने आई और मेरे साथ शक्तिपात भी किया। ये सोलह संस्कार से प्रभावित हुए। इनका ये प्रेम विवाह है। उन्होंने आग बताया कि वे भारतीय संस्कृति से इराक जैसे देश में भी 26 जोड़ों की शादी करा चुके हैं। आज इस शादी से विदेशों में पाणिग्रहण संस्कार का महत्व प्रसारित होगा और विदेशी भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित होंगे।


 

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