Edited By Rohini Oberoi,Updated: 29 Jul, 2026 12:53 PM

तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में स्थित मशहूर पलानी मुरुगन मंदिर की जमीन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। CB-CID ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।मामला मंदिर के पास की 1.4 एकड़ जमीन का है। इस जमीन पर श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त पार्किंग...
नेशनल डेस्क। तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में स्थित मशहूर पलानी मुरुगन मंदिर की जमीन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। CB-CID ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।मामला मंदिर के पास की 1.4 एकड़ जमीन का है। इस जमीन पर श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त पार्किंग चलती है। बाजार में इसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है लेकिन इस महीने की शुरुआत में इसे सिर्फ 2 करोड़ रुपये में निजी लोगों के नाम कर दिया गया।
इस मौके पर अधिकारियों ने बताया कि इन गिरफ्तारियों से मंदिर के नजदीक 1.4 एकड़ जमीन के चर्चित मामले में एक बड़ी कामयाबी मिली है। अधिकारियों के मुताबिक इस जमीन का इस्तेमाल श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त पार्किंग सेवा मुहैया कराने के लिए किया जा रहा है और इसकी बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी गई है। उन्होंने बताया कि इस महीने की शुरुआत में यह महज दो करोड़ रुपये के बदले निजी लोगों के नाम पंजीकृत कर दी गई।
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अधिकारियों ने बताया कि 1888 के एक स्थायी बंदोबस्ती विलेख के तहत यह जमीन केवल धार्मिक और परमार्थ कार्यों के लिए समर्पित थी और इसकी किसी भी तरह की व्यावसायिक बिक्री या हस्तांतरण पर रोक थी इसके बावजूद छह जुलाई को यह जमीन निजी लोगों के नाम पंजीकृत कर दी गई। इस पंजीकरण के दौरान हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग की स्पष्ट और लिखित आपत्तियों को भी नजरअंदाज किया गया।
राज्य सरकार ने इससे पहले गैरकानूनी तरीके से भूखंड पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पलानी के संयुक्त उप पंजीयक जस्टिन मणिकंदन और जिला पंजीयक शशिकला को निलंबित कर दिया था। मणिकंदन को मद्रास उच्च न्यायालय से इस मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत मिली है और हाल में उनसे अपराध शाखा- अपराध अन्वेषण विभाग (सीबी-सीआईडी)ने सात घंटे तक पूछताछ की थी।
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बता दें कि सीबी-सीआईडी को 15 जुलाई को मामले की जांच सौपी गई थी और इस मामले में अबतक कई अधिकारियों सहित 80 लोगों से पूछताछ की गई है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ पहले ही इस मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं और विवादित बिक्री विलेख को अमान्य घोषित कर चुकी है।