Income Tax 2026: ₹12 लाख तक टैक्स फ्री, ₹12-24 लाख और उससे ऊपर की आय पर स्लैब दरें जारी

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 05:55 PM

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फरवरी 2026 के बजट में सरकार ने आयकर की दरों में कोई बदलाव न करके यह साफ कर दिया है कि मौजूदा टैक्स ढांचा ही फिलहाल लागू रहेगा। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बात यह है कि नई कर व्यवस्था के तहत सालाना ₹12 लाख तक की कमाई पर अब भी कोई...

नेशनल डेस्क:  फरवरी 2026 के बजट में सरकार ने आयकर की दरों में कोई बदलाव न करके यह साफ कर दिया है कि मौजूदा टैक्स ढांचा ही फिलहाल लागू रहेगा। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बात यह है कि नई कर व्यवस्था के तहत सालाना ₹12 लाख तक की कमाई पर अब भी कोई टैक्स नहीं देना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि अलग-अलग आय वर्ग के लिए टैक्स की दरें क्या हैं और निवेश व रिटर्न फाइल करने के नियमों में क्या बड़े फेरबदल हुए हैं।

नई बनाम पुरानी कर व्यवस्था: कहां कितना लगेगा टैक्स?

बजट के अनुसार, नई और पुरानी कर व्यवस्था के स्लैब कुछ इस प्रकार हैं:

नई कर व्यवस्था (New Tax Regime):

  • ₹12,00,000 तक: शून्य (कोई टैक्स नहीं)

  • ₹12,00,001 से ₹16,00,000: 15%

  • ₹16,00,001 से ₹20,00,000: 20%

  • ₹20,00,001 से ₹24,00,000: 25%

  • ₹24,00,000 से ऊपर: 30%

पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime):

  • ₹2,50,000 तक: कोई टैक्स नहीं

  • ₹2,50,001 से ₹5,00,000: 5%

  • ₹5,00,000 से ₹10,00,000: 20%

  • ₹10,00,000 से ऊपर: 30%

आईटीआर (ITR) फाइलिंग और सुधार के लिए मिला अतिरिक्त समय

करदाताओं के लिए एक बड़ी प्रशासनिक राहत यह है कि अब संशोधित आयकर रिटर्न (Revised ITR) दाखिल करने की समय सीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने के लिए मामूली शुल्क देना होगा। ₹5,000 या ₹1,000 के दंड के साथ आप अपनी गलतियों को सुधार सकेंगे, जिससे विदेशी निवेश रखने वाले या जटिल रिटर्न भरने वाले लोगों को काफी मदद मिलेगी।

म्यूचुअल फंड और शेयरों से कमाई पर बढ़ेगा कर का बोझ

निवेशकों के लिए बजट में कुछ कड़े प्रावधान भी हैं। 1 अप्रैल 2026 से, शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदने के लिए लिए गए लोन पर चुकाए गए ब्याज पर अब कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा, शेयरों के 'बायबैक' को अब शेयरधारकों के लिए 'कैपिटल गेन' (पूंजीगत लाभ) माना जाएगा, जिस पर 22% से 30% तक टैक्स लग सकता है। यह कदम निवेश से होने वाले लाभ पर टैक्स की स्पष्टता लाने के लिए उठाया गया है।

विदेशी खर्चों और प्रकटीकरण में मिली राहत

सरकार ने विदेश यात्रा, बच्चों की पढ़ाई और वहां इलाज कराने वाले परिवारों के लिए टीसीएस (TCS) की दरों में कटौती की है। साथ ही, छोटे करदाताओं के लिए एक 'माफी योजना' (Amnesty Scheme) भी पेश की गई है। यदि किसी युवा पेशेवर या छात्र ने अनजाने में अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं किया है, तो वे 1 करोड़ रुपये तक की संपत्ति का विवरण देकर और 30% टैक्स चुकाकर कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव: मोटर दुर्घटना राहत और NRI निवेश

एक मानवीय कदम उठाते हुए सरकार ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा मिलने वाले मुआवजे के ब्याज को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया है। इसके अलावा, एनआरआई (NRI) और विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश की सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया गया है, जिससे देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा।

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