Bank Strike on 12 February: 12 फरवरी को बैंकिंग सेवाओं पर असर, कर्मचारी करेंगे राष्ट्रव्यापी हड़ताल

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 10:55 AM

banking services be affected on february 12 as employees go on a nationwide

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) समेत प्रमुख बैंक संगठनों ने 12 फरवरी, 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया है। यह...

बिजनेस डेस्कः ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) समेत प्रमुख बैंक संगठनों ने 12 फरवरी, 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया है। यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU) के संयुक्त आह्वान पर की जा रही है।

बैंक यूनियनों ने यह कदम सरकार द्वारा नवंबर में अधिसूचित चार नए लेबर कोड्स के विरोध और श्रमिक वर्ग पर बढ़ते हमलों के खिलाफ उठाया है।

AIBOA के महासचिव एस नागराजन ने बताया कि उनका संगठन 12 फरवरी की हड़ताल को पूरा समर्थन देगा। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपील की है कि हड़ताल के दिन वे क्लैरिकल कार्य न करें। 28 जनवरी, 2026 को AIBEA, AIBOA और BEFI के महासचिवों द्वारा जारी संयुक्त पत्र में यूनिट्स और सदस्यों से हड़ताल में भाग लेने की अपील की गई है और इसके पीछे के प्रमुख कारणों को विस्तार से बताया गया है।

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नए श्रम कानूनों का विरोध

बैंक संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित लेबर कोड्स पूरी तरह से श्रमिक विरोधी हैं। यूनियनों के रजिस्ट्रेशन के लिए सख्त शर्तें तय की गई हैं, जबकि 300 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के मालिकों को बिना सरकारी अनुमति कर्मचारियों की छंटनी करने का अधिकार दिया जा रहा है। यूनियनों का आरोप है कि यह सब ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर एमएनसी और नियोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

बैंक कर्मचारियों के लिए 5-डे वर्क वीक की मांग

यूनियनों ने बैंक कर्मचारियों के लिए सप्ताह में पांच दिन काम की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि जब वे वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब सरकार नियोक्ताओं को कार्य घंटे बढ़ाने का अधिकार देने की बात कर रही है। नागराजन के अनुसार, RBI, करेंसी एक्सचेंज सेंटर्स, LIC, शेयर बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है, जबकि बैंक कर्मचारी अब भी वैकल्पिक सप्ताहों में छह दिन काम करने को मजबूर हैं।

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निश्चित अवधि के रोजगार पर चिंता

बैंक यूनियनों ने निश्चित अवधि के रोजगार (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच स्थायी नौकरियों के बजाय अस्थायी रोजगार को बढ़ावा देना युवाओं के भविष्य के लिए खतरनाक है। साथ ही यूनियनों का आरोप है कि जहां कर्मचारियों के लिए हड़ताल करना कठिन बना दिया गया है, वहीं नियोक्ताओं को बिना श्रम विभाग की अनुमति तालाबंदी और छंटनी की छूट दी जा रही है।
 

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