Edited By Radhika,Updated: 09 May, 2026 02:19 PM

राजनीति की डगर कभी-कभी बहुत कड़वी साबित होती है। अमेरिका में 'इंटेल' (Intel) जैसी दिग्गज कंपनी में टेक करियर और रियल एस्टेट का सफल बिजनेस छोड़कर जनसेवा के लिए भारत लौटे अनंतन अय्यासामी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हार...
नेशनल डेस्क: राजनीति की डगर कभी-कभी बहुत कड़वी साबित होती है। अमेरिका में 'इंटेल' (Intel) जैसी दिग्गज कंपनी में टेक करियर और रियल एस्टेट का सफल बिजनेस छोड़कर जनसेवा के लिए भारत लौटे अनंतन अय्यासामी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हार के बाद उन्होंने एक ऐसी भावुक पोस्ट साझा की है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
एक हफ्ते के पैसों ने 4 साल की सेवा को हरा दिया
वासुदेवनल्लूर (एससी) सीट से भाजपा उम्मीदवार रहे अय्यासामी को डीएमके के ई. राजा से करीब 6500 वोटों से शिकस्त मिली। हार के बाद उन्होंने अपनी व्यथा साझा करते हुए लिखा"पिछले चार वर्षों में मैंने गांवों के विकास, तालाबों के जीर्णोद्धार और मेडिकल कैंपों के लिए करोड़ों रुपए और अपना पूरा समय लगाया। मेरा सपना एक लाख युवाओं को रोजगार देना था। लेकिन अंत में, चुनाव के महज एक हफ्ते के पैसों ने चार साल की निस्वार्थ सेवा को मात दे दी।"
बेटी के सवाल पर निरुत्तर हुए पिता
अय्यासामी ने अपनी पोस्ट में अपनी 12 साल की बेटी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह अमेरिका छोड़कर भारत आ रहे थे, तो उन्होंने अपनी बेटी को जनसेवा का सपना दिखाया था। चार साल तक वे अपनी बेटी को दूर से बड़ा होते देखने का दर्द सहते रहे। चुनाव नतीजे आने के बाद उनकी बेटी ने वीडियो कॉल पर एक छोटा सा सवाल पूछा: "अप्पा, क्या अब आप मुझे बता सकते हैं कि राजनीति वास्तव में क्या होती है?" अय्यासामी ने लिखा कि जीवन में पहली बार उनके पास अपनी बेटी के लिए कोई जवाब नहीं था।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी प्रतिक्रियाएं
अय्यासामी की इस पोस्ट पर लोग जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए लिखा,"निष्काम भाव से सेवा करते रहिए, आपका समय जरूर आएगा।" वहीं एक अन्य यूजर ने राजनीति की कड़वी हकीकत बयां करते हुए लिखा, "यह दुखद है कि सब कुछ सही करने के बाद भी राजनीति में जीत की गारंटी नहीं होती।"
कौन हैं अनंतन अय्यासामी?
अनंतन अय्यासामी मूल रूप से तेनकासी के रहने वाले हैं। वे अमेरिका में सफल टेक इंजीनियर और बिजनेसमैन थे। भारत लौटकर भाजपा से जुड़े और तेनकासी जिला अध्यक्ष बने। जमीनी स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर वर्कशॉप के लिए जाने जाते हैं। यह घटना उन युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गई है, जो विदेशों की सुख-सुविधा छोड़कर भारतीय राजनीति में बदलाव लाने का सपना देखते हैं।