Edited By Ramkesh,Updated: 11 Jun, 2026 08:00 PM

श्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक एक तेल टैंकर पर अमेरिका द्वारा किये गए हमले में मारे गए नाविक आदित्य शर्मा (23) के परिजनों ने बृहस्पतिवार को हिमाचल सरकार और केंद्र से शर्मा का शव स्वदेश लाने की अपील की। परिवार ने कहा कि वह शर्मा का शव...
नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक एक तेल टैंकर पर अमेरिका द्वारा किये गए हमले में मारे गए नाविक आदित्य शर्मा (23) के परिजनों ने बृहस्पतिवार को हिमाचल सरकार और केंद्र से शर्मा का शव स्वदेश लाने की अपील की। परिवार ने कहा कि वह शर्मा का शव हमीरपुर स्थित उनके पैतृक गांव 'गलोर' लाया जाए, ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। आदित्य चालक दल के उन तीन सदस्यों में शामिल थे जिनकी मौत 10 जून को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना की कार्रवाई में हुई थी।
माता-पिता का इकलौता बेटा आदित्य शर्मा
अमेरिकी सेना ने पलाऊ के ध्वज वाले जहाज 'एमटी सेटेबेलो' को निशाना बनाया था, क्योंकि उस पर ईरान से तेल ले जाने की कोशिश करके अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने का आरोप था। तेल टैंकर पर हमले के समय चालक दल के 24 भारतीय सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया। आदित्य डेक कैडेट प्रशिक्षु था और अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। शर्मा की मौत से पूरी तरह टूट चुके परिवार के सदस्यों ने सवाल किया कि क्या उसे बचाने की पर्याप्त कोशिशें की गई थीं? शर्मा के दादा अशोक ने कहा, ''हम यह जानना चाहते हैं कि जब कैप्टन को आगे न बढ़ने की चेतावनी दी गई थी, तो उन्होंने किस हैसियत से जहाज़ को आगे बढ़ाया। हम पूरे प्रकरण की जांच चाहते हैं।'' मृतक के चाचा संजीव ने बताया कि पहले आदित्य के लापता होने की खबर मिली जिसके बाद से ही परिवार अनहोनी की आशंका से घबराया हुआ था।
आदित्य लापता के लापता होने की मिली थी सूचना
उन्होंने कहा, ''बुधवार रात करीब नौ बजे मुझे भाई का फ़ोन आया कि आदित्य लापता है। मैं तुरंत जालंधर (पंजाब) में अपने भाई के घर पहुंचा। पूरी रात हमने आदित्य का पता लगाने के लिए कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की। रात करीब 1.30 बजे हमें पता चला कि वह अब नहीं रहा।'' संजीव ने बताया कि आदित्य मई में घर आने वाला था, लेकिन उसने एक और महीने तक जहाज पर ही रहने का फैसला किया।
सरकार से शव को जल्द वापस लाने की परिजनों ने की अपील
उन्होंने कहा, ''हम अपने बच्चे का शव वापस लाने की अपील कर रहे हैं ताकि उसका अंतिम संस्कार कर सकें।'' संजीव ने बताया कि उन्होंने हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्र सरकार से शव को जल्द वापस लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, ''हम यह भी जानना चाहते हैं कि हमले के समय रात में आदित्य इंजन के पास क्या कर रहा था, और क्या उसे बचाने की कोई कोशिश की गई थी।''
विदेश मंत्री जयशंकर से की बात
आदित्य शर्मा की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर से ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों और कंपनी से बात करने के लिए कहा है, ताकि उनके शव को जल्द से जल्द भारत लाया जा सके। इस बीच,मुख्यमंत्री सुक्खू ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी कर आदित्य की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और कहा कि राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन को भी परिवार की यथा संभव मदद करने का निर्देश दिया।
यूपी के देवरिया जिले के शिवानंद चौरसिया की मौत
व्यावसायिक पोत पर हुए अमेरिकी हमले में देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी भारतीय नाविक शिवानंद चौरसिया की मृत्यु हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
आंध्र प्रदेश के इंजीनियर सुरेश की मौत
अमेरिका द्वारा ओमान तट के नजदीक हमले में तीन भारतीयों में से आंध्र प्रदेश के निवासी एवं मरीन इंजीनियर सुरेश पटनाला (44) भी शामिल हैं। परिवार और नयी दिल्ली स्थित आंध्र भवन के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। आंध्र भवन के आयुक्त अर्जा श्रीकांत ने पुष्टि की कि वाणिज्यिक जहाज पर सवार जिन तीन चालक सदस्यों की की मौत हुई, उनमें चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला भी शामिल थे। सुरेश की पत्नी भार्गवी ने बताया कि वह 24 जून को अपनी शादी की 15वीं सालगिरह मनाने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। अमेरिकी सेना के मध्य कमान ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि जहाज ने ईरान से तेल ले जाने की कोशिश करके ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिका की नाकेबंदी का उल्लंघन किया।
भार्गवी ने परिवार पर इस त्रासदी के असर को इंगित करते हुए कहा, ''हम चार थे, लेकिन अब हम तीन रह गए हैं।'' उन्होंने बताया कि दोनों बेटे (उम्र कमश: 13 साल और 10 साल) पिता की मौत खबर सुनकर बेहद दुखी हैं और उन्हें शांत कराना मुश्किल हो रहा है। परिवार के अनुसार, सुरेश को जहाज से कार्यमुक्त होने का पत्र मिल चुका था और समुद्र में लगभग पांच महीने बिताने के बाद घर लौटने से पहले वह अपनी जगह लेने वाले व्यक्ति का इंतज़ार कर रहे थे। भार्गवी ने कहा कि सुरेश का मरीन इंजीनियर होना केवल एक पेशा नहीं था, बल्कि उनका जुनून था।