Edited By Rahul Rana,Updated: 10 Aug, 2026 06:40 PM

लोकसभा ने सोमवार को ‘ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026’ को पारित कर दिया। इस बिल में देश के 16 प्रमुख ट्रिब्यूनलों के कामकाज, सदस्यों की नियुक्ति और शिकायतों की निगरानी के लिए नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन बनाने का प्रस्ताव है।
नई दिल्ली: लोकसभा ने सोमवार को ‘ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026’ को पारित कर दिया। इस बिल में देश के 16 प्रमुख ट्रिब्यूनलों के कामकाज, सदस्यों की नियुक्ति और शिकायतों की निगरानी के लिए नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन बनाने का प्रस्ताव है। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच बिल लोकसभा में पेश किया गया और बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि प्रस्तावित कानून से अलग-अलग ट्रिब्यूनलों को उनके संबंधित कानूनों के तहत मिले अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं होगा। यह विधेयक ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 की जगह लेने के लिए लाया गया है।
क्या है नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन?
बिल के तहत बनने वाला नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन देश के 16 ट्रिब्यूनलों के प्रशासन और कामकाज की निगरानी के लिए केंद्रीय संस्था के तौर पर काम करेगा। प्रस्तावित आयोग की जिम्मेदारियों में ट्रिब्यूनलों के चेयरपर्सन और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को संचालित करना, उनके कामकाज की समीक्षा करना और शिकायतों से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी करना शामिल है। इसके अलावा आयोग ‘नेशनल ट्रिब्यूनल डेटा ग्रिड’ भी बनाएगा, जिसमें ट्रिब्यूनलों में लंबित और निपटाए गए मामलों समेत केस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी।
किन ट्रिब्यूनलों पर लागू होगा कानून?
प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में 16 ट्रिब्यूनल शामिल होंगे। इनमें कई महत्वपूर्ण न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाएं शामिल हैं। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT), सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT), इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT), सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT), कस्टम्स, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (CESTAT) जैसे ट्रिब्यूनल शामिल हैं।
कमीशन में कौन-कौन होंगे?
प्रस्तावित नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे। इसमें एक चेयरपर्सन, दो ज्यूडिशियल मेंबर और दो टेक्निकल मेंबर शामिल होंगे। चेयरपर्सन के पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज या किसी हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पात्र होंगे। वहीं, ज्यूडिशियल मेंबर के लिए हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस या जज होने की योग्यता रखी गई है। टेक्निकल मेंबर के लिए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंस, कानून, अकाउंटेंसी, बैंकिंग, मैनेजमेंट या टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में कम से कम 25 साल का अनुभव जरूरी होगा।
नियुक्ति कैसे होगी?
कमीशन के चेयरपर्सन और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। हालांकि, चेयरपर्सन और ज्यूडिशियल मेंबर की नियुक्ति से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करना जरूरी होगा। चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल पांच साल का होगा या वे क्रमशः 70 और 67 वर्ष की आयु तक पद पर रह सकेंगे। इनमें से जो भी पहले होगा, उसी के आधार पर कार्यकाल समाप्त होगा।