Edited By Ramanjot,Updated: 28 Jan, 2026 08:29 PM

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।
नेशनल डेस्क: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इन नियमों का मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव, खासकर SC/ST/OBC वर्ग के खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकना और समानता को बढ़ावा देना बताया गया है।
हालांकि, इन प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज और कुछ राजनीतिक व सामाजिक संगठनों में तीखा विरोध सामने आया है। विरोध करने वालों का कहना है कि ये नियम संतुलित नहीं हैं और एक वर्ग विशेष को निशाने पर रखते हैं।
कलराज मिश्र का तीखा हमला
पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व उत्तराखंड राज्यपाल और विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कलराज मिश्र ने UGC के इन नए नियमों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इन्हें पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। कलराज मिश्र का कहना है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की मूल भावना के खिलाफ हैं। समानता और न्याय जरूरी है, लेकिन किसी एक सामाजिक वर्ग को संदेह के घेरे में रखकर निगरानी और दंड की व्यवस्था बनाना गलत है। इस तरह के प्रावधान सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पुराने नियम बनाम नए प्रावधान
कलराज मिश्र ने यह भी कहा कि 2012 के UGC नियमों में शिकायत निवारण की व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान और निष्पक्ष थी। नए नियमों में शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया एकतरफा प्रतीत होती है। 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी निष्पक्ष जांच और निर्दोषों की गरिमा की रक्षा पर जोर दिया गया है। झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से शिक्षकों और कर्मचारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।
परिषद की प्रमुख मांगें
विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद ने केंद्र सरकार और UGC के सामने कई मांगें रखी हैं—
- UGC के नए Equity Regulations 2026 को तुरंत वापस लिया जाए।
- जाति आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधान हटाए जाएं।
- शिकायत दर्ज कराने का अधिकार सभी वर्गों (छात्र, शिक्षक, स्टाफ) को समान रूप से मिले।
- शिकायत निवारण तंत्र निष्पक्ष, पारदर्शी और संतुलित हो।
- झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो।
- शिकायत समितियों में सभी सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया जाए।
शिक्षा मंत्री से मुलाकात, सौंपा गया ज्ञापन
कलराज मिश्र के नेतृत्व में परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में सतीश शर्मा, के.के. शर्मा, माधव शर्मा, शरद शर्मा, अरविंद भारद्वाज और हरीश शर्मा जैसे पदाधिकारी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से आग्रह किया कि नियमों की व्यापक समीक्षा और संशोधन किया जाए, ताकि समानता के नाम पर किसी वर्ग के साथ अन्याय न हो।