Edited By Tanuja,Updated: 26 May, 2026 07:24 PM

Quadrilateral Security Dialogue देशों ने इंडो-पैसिफिक में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यापार पर जोर दिया। Penny Wong ने चीन के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि Quad किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि के लिए काम कर रहा है।
International Desk: चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (QUAD) देशों की बैठक के बाद ऑस्ट्रेलिया ने चीन को साफ संदेश दिया है कि यह समूह किसी देश के खिलाफ नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि इस समूह का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखना है। नई दिल्ली में हुई इस बैठक में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने की। बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पैनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भी मौजूद रहे। बैठक के बाद पैनी वोंग ने कहा कि चारों देशों का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षित व्यापार, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि यह संगठन किसी तरह की गुटबंदी नहीं कर रहा, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत बना रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन लगातार इस संगठन की आलोचना कर रहा है। चीन का आरोप है कि यह समूह उसे घेरने की कोशिश कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि देशों के बीच सहयोग ऐसा होना चाहिए जो किसी तीसरे देश को निशाना न बनाए। उन्होंने अलग-अलग गुट बनाकर टकराव बढ़ाने का विरोध किया। हालांकि संयुक्त बयान में चीन का नाम सीधे नहीं लिया गया, लेकिन दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई गई। चारों देशों ने कहा कि वे किसी भी ऐसे कदम का विरोध करते हैं जो ताकत या दबाव के जरिए क्षेत्र की स्थिति बदलने की कोशिश करे।
संयुक्त बयान में समुद्री रास्तों में बाधा डालने, जहाजों को रोकने, खतरनाक सैन्य गतिविधियों और विवादित इलाकों में सैन्य ताकत बढ़ाने पर चिंता व्यक्त की गई। जानकारों का मानना है कि यह इशारा चीन की गतिविधियों की तरफ था। बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। चारों देशों ने कहा कि समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट आने से दुनिया भर में ईंधन, खाद्यान्न और उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। बैठक की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक फिजी में नया बंदरगाह परियोजना शुरू करना था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि पहली बार चारों देश मिलकर किसी बंदरगाह परियोजना पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रशांत क्षेत्र में मजबूत और भरोसेमंद बुनियादी ढांचे का उदाहरण बनेगी।
यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि फिजी पहले चीन की बेल्ट एंड रोड योजना के तहत बंदरगाह और जहाज निर्माण परियोजनाओं पर बातचीत कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगठन अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और समुद्री सुरक्षा पर निर्भर करती है। चारों देशों ने विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील भी की। इस संगठन की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। इसे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने आगे बढ़ाया था। बाद में भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हुए।