Edited By Anu Malhotra,Updated: 19 Jun, 2026 09:23 AM

Versova Beach: मुंबई के वर्सोवा बीच से सामने आए एक वायरल वीडियो ने शहर में आवास, गरीबी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। वीडियो में रात के समय सैकड़ों लोग समुद्र किनारे रेत पर चटाइयां बिछाकर सोते नजर आ रहे हैं। इनमें पुरुष, महिलाएं...
Versova Beach: मुंबई के वर्सोवा बीच से सामने आए एक वायरल वीडियो ने शहर में आवास, गरीबी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। वीडियो में रात के समय सैकड़ों लोग समुद्र किनारे रेत पर चटाइयां बिछाकर सोते नजर आ रहे हैं। इनमें पुरुष, महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
गर्मी और बिजली कटौती बनी बड़ी वजह
स्थानीय लोगों के मुताबिक, झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले कई परिवार भीषण गर्मी और बार-बार होने वाली बिजली कटौती से परेशान हैं। टिन की छत वाले छोटे घर दिनभर की गर्मी अपने अंदर समेट लेते हैं, जिससे रात में भी घरों के भीतर रहना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में लोग ठंडी हवा और राहत की तलाश में खुले स्थानों का रुख कर रहे हैं।
रात बीच पर, सुबह घर वापसी
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कई परिवार समूह बनाकर समुद्र तट पर रात गुजार रहे हैं। लोग अपने साथ चटाइयां और जरूरी सामान लेकर आते हैं और सुबह होने पर वापस घर लौट जाते हैं। गर्मी से बचने का यह तरीका अब कई इलाकों में आम होता दिखाई दे रहा है।
मीरा-भयंदर में भी सामने आए थे ऐसे दृश्य
इससे पहले मीरा-भयंदर के आनंद दिघे ग्राउंड से भी इसी तरह की तस्वीरें सामने आई थीं। वहां बड़ी संख्या में लोग खुले मैदान में रात बिताते हुए दिखाई दिए थे। स्थानीय जांच में सामने आया कि अधिकांश लोग आसपास की बस्तियों के निवासी थे, जो घरों के भीतर बढ़ती गर्मी के कारण बाहर सोने को मजबूर थे।
वर्सोवा बीच का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स ने इसे महानगरों में आवास और बुनियादी सुविधाओं की कमी का नतीजा बताया। वहीं, कई लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह रात बिताने से जुड़ी सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी चिंताएं भी उठाईं।
वर्सोवा बीच की ये तस्वीरें केवल गर्मी से राहत की कोशिश नहीं, बल्कि उन चुनौतियों की भी कहानी कहती हैं जिनका सामना शहर के हजारों निम्न आय वर्ग के परिवार रोजाना करते हैं। बढ़ती गर्मी, सीमित रहने की जगह और कमजोर बुनियादी सुविधाएं लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर कर रही हैं।