मेट्रो में 'How to Kill Men' किताब पढ़ती दिखी लड़की, सोशल मीडिया पर छिड़ गई जबरदस्त बहस (Video)

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 04:29 PM

metro passenger spotted reading how to kill men book

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में मेट्रो में सफर कर रही महिला "How to Kill Men and Get Away With It" नाम की किताब पढ़ती दिख रही है। किताब के शीर्षक ने लोगों का ध्यान खींचा, लेकिन यह एक काल्पनिक डार्क कॉमेडी और साइकोलॉजिकल थ्रिलर उपन्यास है, न कि...

nternational Desk:  सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मेट्रो में सफर कर रही एक महिला "How to Kill Men and Get Away With It" शीर्षक वाली किताब पढ़ती नजर आ रही है। किताब का नाम देखते ही वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। वीडियो को अब तक करीब 1.9 करोड़ (19 मिलियन) से अधिक बार देखा जा चुका है और 4 लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। वीडियो में महिला शांतिपूर्वक किताब पढ़ रही है, लेकिन किताब के कवर पर लिखा शीर्षक देखकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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कुछ लोगों ने इसे मजाकिया अंदाज में लिया।  कुछ ने इसे हाल की चर्चित घटनाओं से जोड़ने की कोशिश की।  कई यूजर्स ने कहा कि केवल शीर्षक देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। कुछ ने कहा  फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया। यह किस शहर या किस देश की मेट्रो का है। महिला वास्तव में किताब पढ़ रही थीं या केवल किताब हाथ में थी।  'How to Kill Men and Get Away With It'? यह कैटी ब्रेंट द्वारा लिखा गया एक काल्पनिक (Fiction) साइकोलॉजिकल थ्रिलर,  डार्क कॉमेडी, क्राइम फिक्शन व  सामाजिक व्यंग्य (Satire) उपन्यास है।

 

क्या है कहानी?
उपन्यास की मुख्य पात्र किटी कॉलिन्स (Kitty Collins) नाम की एक युवा महिला है, जो बाहर से सफल और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय दिखती है, लेकिन भीतर गुस्से और निराशा से जूझ रही होती है।कहानी में वह उन पुरुषों को निशाना बनाती है जो महिलाओं के साथ हिंसा, उत्पीड़न या शोषण करते हैं। इसके बाद घटनाक्रम अपराध, जांच और उसके दोहरे जीवन के इर्द-गिर्द आगे बढ़ता है। पूरी कहानी काल्पनिक है और सस्पेंस तथा व्यंग्य के माध्यम से समाज के कुछ मुद्दों पर टिप्पणी करती है।

 

यह किसी वास्तविक हत्या, अपराध या व्यक्ति पर आधारित पुस्तक नहीं है। इसे मनोरंजन और सामाजिक व्यंग्य के उद्देश्य से लिखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि साहित्य और फिल्मों में कई बार जानबूझकर उत्तेजक या चौंकाने वाले शीर्षक रखे जाते हैं, ताकि पाठकों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। ऐसे शीर्षकों को वास्तविक जीवन में अपराध का समर्थन या मार्गदर्शन मानना सही नहीं होगा।

 
 

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