Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Apr, 2026 12:15 PM

west bengal elections: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है और राजनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अगले महीने राज्य की 294 सीटों के लिए दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान होना है। चुनाव से ठीक पहले एक न्यूज चैनल और Vote Vibe के ताजा...
west bengal elections: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है और राजनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अगले महीने राज्य की 294 सीटों के लिए दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान होना है। चुनाव से ठीक पहले एक न्यूज चैनल और Vote Vibe के ताजा ओपिनियन पोल ने राज्य का सियासी पारा बढ़ा दिया है। सर्वे के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता का जादू अब भी बरकरार है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जीत का चौका लगाने की ओर बढ़ रही है।
बंगाल में फिर खिल सकता है 'घास-फूल', बहुमत का आंकड़ा पार!
सर्वे के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC एक बार फिर सत्ता पर काबिज हो सकती है। अनुमान है कि पार्टी 184 से 194 सीटें जीत सकती है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (148) से काफी ज्यादा है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल भाजपा को 98 से 108 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वोट शेयर की बात करें तो TMC 41.9% के साथ सबसे आगे है, जबकि भाजपा 34.9% वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर बनी हुई है।
मुख्यमंत्री की रेस में 'दीदी' सबसे आगे
जनता के बीच ममता बनर्जी आज भी मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद बनी हुई हैं। सर्वे में 48.8% लोगों ने उन्हें सीएम के तौर पर चुना, जबकि भाजपा के शुभेंदु अधिकारी 33.4% लोगों की पसंद बनकर उभरे।
राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की राय कुछ इस प्रकार रही:
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सकारात्मक: लगभग 43.3% लोगों ने सरकार के काम को 'अच्छा' या 'बहुत अच्छा' माना।
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नकारात्मक: करीब 38.9% लोगों ने काम को 'खराब' या 'बहुत खराब' की श्रेणी में रखा।
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भरोसा: करीब 36.5% मतदाता अपने मौजूदा TMC विधायकों को ही दोबारा मौका देने के पक्ष में हैं।
क्या है वोटरों का मिजाज और भाजपा की चुनौतियां?
ओपिनियन पोल ने समाज के अलग-अलग वर्गों के रुझान को भी स्पष्ट किया है। मुस्लिम समुदाय में ममता बनर्जी की पकड़ काफी मजबूत दिख रही है, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार के काम की सराहना की है। इसके विपरीत, सवर्ण हिंदू और अनुसूचित जनजाति वर्ग में सरकार के प्रति कुछ नाराजगी देखी गई है।
सर्वे में भाजपा के लिए कुछ चिंताजनक पहलू भी सामने आए हैं:
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भीतरी कलह: करीब 19.9% लोगों का मानना है कि भाजपा के अंदर गुटबाजी और आपसी लड़ाई एक बड़ी समस्या है।
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नेतृत्व और संस्कृति: 17.2% लोगों को लगता है कि पार्टी के पास राज्य स्तर पर बड़े चेहरे की कमी है, वहीं 12.5% का मानना है कि भाजपा अब भी बंगाल की संस्कृति को पूरी तरह समझ नहीं पाई है।