बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की BJP सरकार का बड़ा फैसला- खुले में कुर्बानी पर रोक, नियम तोड़ने पर 6 महीने तक की जेल

Edited By Updated: 14 May, 2026 12:10 PM

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बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पशु वध को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी नए निर्देशों के मुताबिक अब खुले स्थानों या सार्वजनिक जगहों पर पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी। पशु वध केवल उन्हीं...

नेशनल डेस्क:  बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पशु वध को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी नए निर्देशों के मुताबिक अब खुले स्थानों या सार्वजनिक जगहों पर पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी। पशु वध केवल उन्हीं जगहों पर मान्य होगा जिन्हें नगर पालिका या स्थानीय प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर अनुमति दी हो।

सरकार ने साफ किया है कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट किसी भी पशु, मवेशी या भैंस का वध पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

26 मई को मनाई जाएगी बकरीद
राज्य प्रशासन ने यह फैसला ईद-उल-अजहा यानी बकरीद से पहले लिया है, जो इस साल 26 मई 2026 को मनाई जाएगी। त्योहार के दौरान बड़े पैमाने पर होने वाली कुर्बानी को देखते हुए सरकार ने नियंत्रण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकारी नोटिफिकेशन में पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 और कलकत्ता हाई कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि नियमों का उद्देश्य अवैध पशु वध को रोकना और तय मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए सख्त नियम
नए आदेश के तहत अब पशु वध की अनुमति तभी मिलेगी जब संबंधित पशु के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाए। यह प्रमाणपत्र नगर पालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक की संयुक्त सहमति से जारी होगा। प्रशासन के अनुसार केवल उन्हीं पशुओं के वध की अनुमति दी जाएगी जो: बहुत अधिक उम्र के हों,गंभीर रूप से घायल हों,किसी विकृति का शिकार हों, या लाइलाज बीमारी से पीड़ित हों। सर्टिफिकेट जारी करने वाले अधिकारियों को लिखित रूप में यह स्पष्ट करना होगा कि पशु वध के योग्य है।

सार्वजनिक स्लॉटर हाउस पर भी रोक
सरकार ने सार्वजनिक स्लॉटर हाउस में भी पशु वध पर रोक लगाने का फैसला किया है। अब केवल तयशुदा और अधिकृत वधशालाओं में ही यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। प्रशासन का कहना है कि इससे अव्यवस्था और नियमों के उल्लंघन को रोका जा सकेगा।

नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माना
पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर: 6 महीने तक की जेल, 1000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इनकार किया जाता है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास शिकायत दर्ज करा सकता है।

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