Edited By Mansa Devi,Updated: 12 Jan, 2026 06:08 PM

मौत हमेशा से इंसान के लिए सबसे बड़ा रहस्य रही है। अक्सर लोग सवाल करते हैं कि जब किसी की मौत नजदीक होती है, तो उसके अंदर क्या महसूस होता है। क्या सच में हमें कोई सफेद रोशनी दिखती है। क्या हमारी पुरानी यादें आंखों के सामने घूमने लगती हैं।
नेशनल डेस्क: मौत हमेशा से इंसान के लिए सबसे बड़ा रहस्य रही है। अक्सर लोग सवाल करते हैं कि जब किसी की मौत नजदीक होती है, तो उसके अंदर क्या महसूस होता है। क्या सच में हमें कोई सफेद रोशनी दिखती है। क्या हमारी पुरानी यादें आंखों के सामने घूमने लगती हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मौत के इस रहस्य पर शोध कर इसे समझने की कोशिश की है।
दिमाग में चलती है यादों की फिल्म
Metro.co.uk की रिपोर्ट के अनुसार, शरीर के काम करना बंद करने के बावजूद मस्तिष्क के कुछ हिस्से अंतिम समय तक सक्रिय रहते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि मौत से ठीक पहले ‘गामा ऑसिलेशन’ नामक मस्तिष्क तरंगें बढ़ जाती हैं। ये वही तरंगें हैं, जो हम सपने देखते समय, ध्यान लगाते समय या किसी पुरानी याद को याद करते समय महसूस करते हैं। इसका मतलब है कि मौत के समय व्यक्ति अपने जीवन के यादगार पल फ्लैशबैक की तरह देख सकता है। वैज्ञानिक इसे Near-Death Experience (NDE) कहते हैं। इसमें मरते हुए व्यक्ति अपने परिवार और प्रियजनों के चेहरे देख सकता है। यह खोज कार्डियक अरेस्ट के मरीजों के दिमाग की गतिविधियों का अध्ययन करने के दौरान सामने आई। शोध में पता चला कि मौत केवल अंधकार नहीं है बल्कि दिमाग के लिए एक खास और अजीब तरह का अनुभव हो सकता है।
दिमाग हाइपर एक्टिव हो जाता है
अमेरिका के लुइसविले यूनिवर्सिटी के न्यूरोसर्जन डॉ. अजमल जेम्मार ने एक 87 वर्षीय मरीज पर स्टडी की। मरीज को मिर्गी का दौरा पड़ा और ईईजी (EEG) मॉनिटरिंग के दौरान अचानक दिल का दौरा पड़ा और मरीज की मौत हो गई। शोध में पाया गया कि हार्ट रुकने के बाद भी लगभग 30 सेकंड तक मस्तिष्क में हाई-लेवल एक्टिविटी बनी रहती है। डॉ. अजमल के अनुसार, “मौत के समय दिमाग अचानक बंद नहीं होता। इसमें गामा, थीटा, अल्फा और बीटा वेव्स जैसी अलग-अलग ब्रेन तरंगें सक्रिय हो जाती हैं। ये तरंगें आमतौर पर सपने, यादें और सोचने-समझने की प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं।”
मौत के लिए दिमाग तैयारी करता है
शोध से यह भी पता चला कि मौत के करीब दिमाग हमें आखिरी समय के लिए तैयार करता है। यह जीवन की अहम घटनाओं और यादों को दोबारा जीने का अवसर देता है। यही कारण है कि कई लोग Near-Death Experience में जीवन के फ्लैशबैक की बात करते हैं।
क्या दिखती है सफेद रोशनी?
अक्सर NDE अनुभव वाले लोग एक सुरंग जैसी अंधेरी गली और उसके अंत में तेज सफेद रोशनी देखने का दावा करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, जैसे ही दिल काम करना बंद करता है, दिमाग में खून की कमी और ऑक्सीजन की कमी शुरू होती है। इससे आंख और विजुअल कॉर्टेक्स के बीच संपर्क टूटता है और ‘टनल विजन’ या सुरंग जैसी रोशनी दिखाई देती है।
मौत के समय महसूस होती है शांति
अध्ययनों में यह भी पाया गया कि मौत के करीब दिमाग में एंडोर्फिन और अन्य न्यूरोकेमिकल्स रिलीज होते हैं। ये कैमिकल्स डर और दर्द को कम करते हैं। इस वजह से, मरने के बाद लौटने वाले या होश में आने वाले लोग अक्सर अजीब तरह की शांति और सुकून महसूस करते हैं।