कैंसर के 70% मरीज क्यों झेलते हैं नींद की बीमारी? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Edited By Updated: 28 Dec, 2025 01:36 PM

why do 70 of cancer patients suffer from sleep disorders

नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी हवा, पानी और खाना। नींद के दौरान शरीर की मरम्मत होती है, दिमाग शांत रहता है और इमोशनल बैलेंस बना रहता है। लेकिन कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी नींद लेना अक्सर मुश्किल हो जाता है।

नेशनल डेस्क: नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी हवा, पानी और खाना। नींद के दौरान शरीर की मरम्मत होती है, दिमाग शांत रहता है और इमोशनल बैलेंस बना रहता है। लेकिन कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी नींद लेना अक्सर मुश्किल हो जाता है। रिसर्च बताती है कि कैंसर के लगभग हर दूसरे मरीज को नींद से जुड़ी कोई न कोई समस्या होती है।

दर्द और शारीरिक परेशानियां करती हैं नींद खराब
कैंसर शरीर और मन दोनों पर असर डालता है। ट्यूमर की वजह से दर्द, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, खुजली या पेशाब की समस्या हो सकती है। बार-बार दर्द और असहजता के कारण मरीज की नींद लगातार टूटती रहती है। बुखार और थकान भी नींद में बाधा डालते हैं, जिससे गहरी नींद नहीं मिल पाती।


इलाज के साइड-इफेक्ट्स भी हैं नींद की बाधा
कैंसर का इलाज आवश्यक है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव नींद पर असर डालते हैं। कीमोथेरेपी, रेडिएशन, हार्मोन थेरेपी, स्टेरॉइड, दर्द निवारक और कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाएं रात में नींद में बाधा डाल सकती हैं। मतली, पसीना आना, गर्मी या पेट की परेशानियां रात में बढ़ जाती हैं, जिससे मरीज को सोने और सोए रहने में दिक्कत होती है।


मानसिक तनाव और चिंता भी बड़ी वजह
कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और उनके परिवार में डर, चिंता और भविष्य की फिक्र शुरू हो जाती है। इलाज का डर, मौत का डर या परिवार की चिंता दिमाग को इतना व्यस्त कर देती है कि आराम करना मुश्किल हो जाता है। यही तनाव अनिद्रा (Insomnia) की सबसे बड़ी वजह बन जाता है।


कैंसर मरीजों में आम स्लीप डिसऑर्डर
कैंसर मरीजों में कई तरह के स्लीप डिसऑर्डर देखे जाते हैं। जैसे:

  • नींद न आना या बार-बार जागना
  • दिन में अधिक नींद आना
  • रात में जागना और दिन में सोना
  • सांस से जुड़ी समस्या वाले मरीजों में स्लीप एपनिया

नींद बार-बार टूटने से शरीर को गहरी नींद नहीं मिलती, जो याददाश्त, ताकत और मानसिक संतुलन के लिए जरूरी है।

नींद की कमी से होने वाले असर
नींद पूरी न होने पर मरीज को कई परेशानियां होती हैं। कमजोरी और थकान बढ़ जाती है, इलाज सहन करने की क्षमता कम हो जाती है, चिड़चिड़ापन, चिंता और डिप्रेशन बढ़ सकता है। ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता घटती है। लंबे समय तक नींद की कमी से जीवन स्तर (Quality of Life) प्रभावित होता है।


कैंसर मरीजों की नींद सुधारने के उपाय
नींद को बेहतर बनाने के लिए कुछ तरीके मददगार साबित हो सकते हैं:

  • रोज एक ही समय पर सोना और जागना
  • सोने का कमरा शांत, अंधेरा और ठंडा रखना
  • सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूरी

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