Edited By Rohini Oberoi,Updated: 25 Feb, 2026 03:36 PM

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए वैज्ञानिक अब प्रकृति के सबसे छोटे योद्धाओं बैक्टीरिया का सहारा ले रहे हैं। एक ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए ऐसे बैक्टीरिया तैयार किए हैं जो ट्यूमर के उस हिस्से में भी...
Cancer Treatment Bacteria Research : कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए वैज्ञानिक अब प्रकृति के सबसे छोटे योद्धाओं बैक्टीरिया का सहारा ले रहे हैं। एक ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए ऐसे बैक्टीरिया तैयार किए हैं जो ट्यूमर के उस हिस्से में भी घुसकर हमला कर सकते हैं जहां ऑक्सीजन की कमी के कारण दवाएं नहीं पहुंच पातीं।
मिट्टी का वह कण जो बनेगा कैंसर का काल
इस रिसर्च का केंद्र 'क्लोस्ट्रीडियम स्पोरोजेन्स' (Clostridium sporogenes) नाम का बैक्टीरिया है। यह आमतौर पर मिट्टी में पाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बिना ऑक्सीजन वाले माहौल में बहुत तेजी से पनपता है। बड़े कैंसर ट्यूमर के अंदरूनी हिस्से में ऑक्सीजन नहीं होती जिसे डेड जोन कहा जाता है। ये बैक्टीरिया सीधे ट्यूमर के केंद्र में जाकर बैठ जाते हैं वहां के पोषक तत्व खाते हैं और कैंसर कोशिकाओं को भीतर से खोखला कर देते हैं।
चुनौती: ऑक्सीजन से मौत का डर
दिक्कत तब आती थी जब ये बैक्टीरिया ट्यूमर को अंदर से खाते हुए बाहरी किनारों तक पहुंचते थे। ट्यूमर के बाहरी हिस्से में ऑक्सीजन होती है। जिसके संपर्क में आते ही ये बैक्टीरिया मर जाते थे। इससे कैंसर पूरी तरह खत्म नहीं हो पाता था।

समाधान: कोरम सेंसिंग और जेनेटिक बदलाव
वैज्ञानिकों ने एसीएस सिंथेटिक बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इस समस्या का हल निकाला है। शोधकर्ताओं ने एक दूसरे बैक्टीरिया से ऐसा जीन निकाला जो ऑक्सीजन को झेल सकता है और उसे कैंसर-मारने वाले बैक्टीरिया में फिट कर दिया।
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बैक्टीरिया को यह पता चले कि उसे कब सुरक्षा कवच (ऑक्सीजन झेलने की शक्ति) ऑन करना है इसके लिए कोरम सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया गया। जब ट्यूमर के अंदर बैक्टीरिया की संख्या काफी बढ़ जाती है तो वे एक केमिकल सिग्नल छोड़ते हैं। यह सिग्नल मिलते ही बैक्टीरिया का 'ऑक्सीजन-टॉलरेंस' जीन एक्टिवेट हो जाता है।
DNA सर्किट: शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित
वैज्ञानिकों ने इस पूरी प्रणाली को एक DNA सर्किट की तरह डिजाइन किया है जैसे बिजली के किसी उपकरण में बटन दबाते ही बल्ब जल जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि बैक्टीरिया केवल ट्यूमर के भीतर ही सक्रिय हों और शरीर के स्वस्थ अंगों को कोई नुकसान न पहुंचाएं।

अगला कदम: प्री-क्लिनिकल ट्रायल
फिलहाल यह प्रयोग प्रयोगशाला के स्तर पर सफल रहा है। अब वैज्ञानिक इन स्मार्ट बैक्टीरिया का जानवरों पर 'प्री-क्लिनिकल ट्रायल' करने की तैयारी कर रहे हैं। यदि यह सफल रहा तो भविष्य में कीमोथेरेपी के बजाय बैक्टीरिया के जरिए कैंसर का सटीक और सुरक्षित इलाज संभव हो सकेगा।